भारत का भूगोल (भाग :- 18) भारत के उद्योग। bharat ke udyog

●विश्व में सर्वप्रथम औद्योगिक क्रांति इंग्लैंड में हुई थी।

●स्वतंत्रता के पश्चात भारत की प्रथम औद्योगिक नीति की घोषणा 6 अप्रैल 1948 को तत्कालीन केंद्रीय उद्योग मंत्री डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के द्वारा की गई थी।

●दूसरी औद्योगिक नीति की घोषणा 30 अप्रैल 1956 को की गई।
●उद्योगों को सार्वजनिक निजी तथा संयुक्त क्षेत्रों में विभाजित किया गया।
●24 जुलाई 1991 में सरकार ने औद्योगिक क्षेत्र में उदारीकरण की नीति की घोषणा की।
●भारत में आधुनिक उद्योग का प्रारंभ 1854 में सी.एन. ढेबर द्वारा मुंबई में सूती मिल की स्थापना के साथ माना जाता है।
●भारत का सबसे प्राचीन औद्योगिक प्रदेश कोलकाता हुगली है।

औद्योगिक नगर :- जहां 60% से अधिक जनसंख्या विभिन्न उद्योगों में लगी हो औद्योगिक नगर कहलाते हैं।

औद्योगिक गलियारे (इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) :-

किसी सड़क या नदी के किनारे स्थित विभिन्न औद्योगिक इकाइयों का समूह औद्योगिक गलियारा कहलाता है।

औद्योगिक प्रदेश :-

भारत में तीन प्रकार के औद्योगिक प्रदेश पाए जाते हैं।
1.वृहद औद्योगिक प्रदेश
2.लघु औद्योगिक प्रदेश
3.विनिर्माण जिले या औद्योगिक जिले

वृहद औद्योगिक प्रदेश :-

भारत में कुल 8 मुख्य वृहद औद्योगिक क्षेत्र हैं।
•मुंबई-पुणे-कोल्हापुर औद्योगिक प्रदेश
•कोलकाता-हुगली-औद्योगिक प्रदेश
•बेंगलुरु-तमिलनाडु-चेन्नई-कोयंबटूर औद्योगिक प्रदेश
•अहमदाबाद-वडोदरा-सूरत(गुजरात)द्योगिक प्रदेश
•छोटा नागपुर औद्योगिक प्रदेश
•विशाखापट्टनम-गुंटूर औद्योगिक प्रदेश
•गुड़गांव-दिल्ली-मेरठ औद्योगिक प्रदेश
•कोलम-तिरुवंतपुरम औद्योगिक प्रदेश

लघु औद्योगिक प्रदेश :-

भारत में कुल 13 लघु औद्योगिक प्रदेश है।
•अंबाला-अमृतसर
•सहारनपुर- मुजफ्फरनगर- बिजनौर
•इंदौर- देवास- उज्जैन
•जयपुर-अजमेर
•कोल्हापुर-दक्षिणी कन्नड़
•उत्तरी मालाबार
•दक्षिणी मालाबार
•आदिलाबाद-निजामाबाद
•इलाहाबाद-वाराणसी-मिर्जापुर
•भोजपुर-मुंगेर
•दुर्ग-रायपुर
•बिलासपुर-कोरबा
•ब्रह्मपुत्र घाटी

औद्योगिक जिले :-

भारत में कुल 15 औद्योगिक जिले हैं।
•कानपुर
•लखनऊ
•बरेली
•आगरा - चमड़ा, जूता,सूती वस्त्र,पत्थर पर नक्काशी
•गोरखपुर
•जबलपुर
•हैदराबाद
•नागपुर
•ग्वालियर
•भोपाल
•कटक- सूतीवस्त्र,कृषि उपकरण, खेल सामग्री
•जलपाईगुड़ी
•अलीगढ़
•कोटा
•पूर्णिया

भारत में उद्योग : 

प्रमुख भारतीय उद्योग निम्नलिखित हैं।

लोहा एवं इस्पात उद्योग :-

●देश का पहला लौह इस्पात कारखाना 1874 में बंगाल आयरन वर्क्स के नाम से बराबर नदी के किनारे कुल्टी(आसनसोल प.बंगाल) में स्थापित किया गया था।
●देश में सबसे पहला बड़े पैमाने का कारखाना 1907 में जमशेदपुर में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी की (टिस्को) की स्थापना के साथ आरंभ हुआ।
यह कारखाना स्वर्णरेखा नदी घाटी में साकची (बिहार) में स्थापित हुआ था।
●इसके बाद 1919 में बर्नपुर में इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी की(IISCO) स्थापना हुई।
यह कंपनी दामोदर नदी घाटी में हीरापुर (पश्चिम बंगाल) में स्थापित की गई थी। 
●इसका उत्पादन 1922 से शुरू हुआ। आगे चलकर कुल्टी, बर्नपुर तथा हीरापुर स्थित संयंत्रों को (IISCO) में मिला दिया गया।
●यह दोनों कारखाने निजी क्षेत्र में स्थापित किए गए थे।
●सार्वजनिक क्षेत्र की पहली इकाई 1923 में भद्रावती(कर्नाटक) में विश्वेश्वरैया आयरन एंड स्टील वर्क(VISCL) की स्थापना के साथ आरंभ किया गया था। इसका पुराना नाम मैसूर आयरन एंड स्टील वर्क्स था।
●स्टील कॉर्पोरेसन ऑफ बंगाल की स्थापना 1937 में बर्नपुर(प.बंगाल) में की गई थी। 1953 में इसे भारतीय लौह-इस्पात कम्पनी(IISCO) में मिला दिया गया।

स्वतंत्रता के बाद स्थापित लौह इस्पात कारखाना :-

 ●स्वतंत्रता के बाद द्वितीय पंचवर्षीय योजना(1956-61) में विदेशी सहयोग से तीन नए इस्पात संयंत्र की स्थापना की गई। 
•राउरकेला (उड़ीसा), 
•भिलाई (छत्तीसगढ़), 
•दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) ।
●यह सभी सार्वजनिक क्षेत्र के संयंत्र हिंदुस्तान स्टील लिमिटेड(HSL) के अधिकार में थे।
1973 में इन संयंत्रों पर प्रबंधन के लिए स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया(SAIL) की स्थापना की गई।

दूसरी पंचवर्षीय योजनाकाल(1956-61) में स्थापित कारखाना :-

हिंदुस्तान स्टील लिमिटेड राउरकेला 

(राउरकेला इस्पात सयंत्र) :-
●राउरकेला इस्पात संयंत्र जर्मनी के सहयोग से 1959 में उड़ीसा के सुंदरगढ़ जिले में स्थापित किया गया था।
इसे झरिया(झारखंड) से कोयला और सुंदरगढ़,केंदुझर से लौह अयस्क प्राप्त होता है।

भिलाई इस्पात संयंत्र :-

●भिलाई इस्पात संयंत्र रूस के सहयोग से छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थापित किया गया था। 
●इसमें उत्पादन 1959 में आरंभ हुआ था।
इसे कोयला कोरबा, करगाली की खानों से और लौह अयस्क डल्ली राजहरा की खानों से प्राप्त होता है।

हिन्दुस्तान स्टील लिमिटेड दुर्गापुर

(दुर्गापुर इस्पात सयंत्र) :-
●दुर्गापुर इस्पात संयंत्र की स्थापना यूनाइटेड किंगडम(ब्रिटेन) के सरकार की सहायता से पश्चिम बंगाल में स्थापित किया गया था। 
●इसमें 1962 में उत्पादन आरंभ हुआ था। 
यह संयंत्र रानीगंज, झरिया कोयला पेटी में स्थित है। लौह अयस्क नोआमंडी से प्राप्त होता है।

तृतीय पंचवर्षीय योजनाकाल में स्थापित कारखाना :-


बोकारो इस्पात सयंत्र :-
●यह इस्पात संयंत्र सोवियत संघ(रूस)के सहयोग से बोकारो(झारखंड) में 1964 में स्थापित किया गया था।

चौथी पंचवर्षीय योजनाकाल में स्थापित कारखाना :-

●चौथी पंचवर्षीय योजना के तहत तीन नए इस्पात संयंत्र दक्षिण भारत में स्थापित किए गए।

विजाग इस्पात सयंत्र या विशाखापट्नम इस्पात सयंत्र :-

●पहला पत्तन आधारित सयंत्र की शुरुआत 1992 में विशाखापट्नम(आन्ध्र प्रदेश) में हुई।

विजयनगर इस्पात संयंत्र :-

●होसपेट वेलारी जिला कर्नाटक में स्थित है।

सलेम इस्पात संयंत्र :-

●सलेम इस्पात संयंत्र 1982 में तमिलनाडु में स्थापित किया गया।

●भारत का पहला तटवर्ती इस्पात कारखाना विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश) में लगाया गया था।

स्पंज आयरन के उत्पादन में भारत का विश्व में प्रथम स्थान है।
 

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया(SAIL) :-

●24 जनवरी,1973 को 2000 करोड़ की पूँजी के साथ भारत इस्पात प्राधिकरण (steel authority of india) को  राउरकेला, भिलाई, दुर्गापुर, बोकारो, बर्नपुर, सलेम, विश्वेश्वराया लौह इस्पात कारखाना को एक साथ मिलाकर संचालन करने की जिम्मेदारी दी गई।

 एलुमिनियम उद्योग :-


●भारत का पहला एल्मुनियम संयंत्र 1937 में जे.के. नगर आसनसोल (पश्चिम बंगाल) में स्थापित किया गया था।
●इसके बाद 1938 में चार कारखाने स्थापित किए गए :-
•मुरी(झारखंड)
•अंलवाय(केरल)
•वेलूर(प.बंगाल)
•हीराकुंड(ओड़िसा)

●नेशनल एल्युमिनिय कंपनी लिमिटेड (नाल्को) भारत का सबसे बड़ा एकीकृत एल्युमिनिय परियोजना कंपलेक्स है इसकी स्थापना 1981 में हुई थी। 
●इसका मुख्यालय भुवनेश्वर में है।
●नाल्को को नवरत्न का दर्जा 2008 में मिला।

 भारत की प्रमुख एल्युमिनियम कंपनी

कंपनीसहायक देश  प्रमुख केंद्र
बाल्कोसोवियत संघकोरबा(छत्तीसगढ़),कोयना(महाराष्ट्र)
नाल्कोफ्रांसदामन जोड़ी (ओड़िसा)
 हिंडाल्कोयू.एस. ए. रेणुकूट (उत्तर प्रदेश)
इंडाल्कोकनाडाजे.के.नगर (प.बंगाल)
मुरी(झारखंड)
अंलवाय(केरल)
माल्कोइटली  चेन्नई, मेट्टूर
 सलेम (तमिलनाडु)
वेदांता जर्मनी झारसुगुड़ा

 सूती वस्त्र उद्योग :-

●सूती वस्त्र उद्योग की शुरुआत 18 वीं शताब्दी में 
पावरलूम ने पहले ब्रिटेन में और बाद में विश्व के अन्य दूसरे भागों में शुरुआत की।
●ढाका का मलमल, मुसलीपटनम की छींट,कालीकट के केलिको,बुराहनपुर-सूरत-बड़ोदरा के सुनहरी जरी के काम वाले सूती वस्त्र विश्वविख्यात है।
●देश में प्रथम वस्त्र उद्योग 1818 में कोलकाता के समीप फोर्ट गैलेस्टर में स्थापित हुआ था। लेकिन कुछ समय बाद यह बंद हो गया।
●पहली सफल वस्त्र मिल मुंबई में 1854 में कवासजी डावर द्वारा स्थापित की गई थी। जिसमे 1856 से उत्पादन आरंभ हुआ था।
●रोजगार प्रदान करने की दृष्टि से सूती वस्त्र उद्योग कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है। यह भारत का सबसे प्राचीन उद्योग है।
●सूती वस्त्र उद्योग का सर्वाधिक केंद्रीकरण महाराष्ट्र एवं गुजरात में हुआ।
●मुंबई को भारत की सूती वस्त्रों की राजधानी के उपनाम से जाना जाता है।
●अहमदाबाद को भारत का बोस्टन कहा जाता है।
कानपुर को उत्तर भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है।
कोयम्बटूर को दक्षिण भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है।

जूट उद्योग (सोने का रेशा):-

 ●देश का प्रथम जूट कारखाना जार्ज ऑकलैंड द्वारा 1859 में कोलकाता के समीप रिशरा स्थान पर लगाया गया था।
 ●भारतीय जूट निगम की स्थापना 1971 में जूट के आयात, निर्यात एवं आंतरिक बाजार की देखभाल के लिए की गई थी।
●जूट से बनी वस्तुओं के उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान भारत का है।
●अंतरराष्ट्रीय जूट संगठन की स्थापना 1984 में हुई थी। इसका मुख्यालय ढाका में है।

जूट उद्योग से संबंधित प्रमुख क्षेत्र 

प.बंगाल:- हावड़ा, बैरकपुर, बजबज, शिवपुर 
रिशरा, टीटागढ़, बाली,अगर पड़ा,बासबेरिया, काकिनारा,सीरामपुर, उलबेरिया, सियालदह,बिरलापुर, होलीनगर, श्यामनगर।
आन्ध्र प्रदेश :-  आंध्र प्रदेश जूट के समान का द्वितीय बृहतम उत्पादक हैै।
ऐलुरु, गुंटूर, विशाखापटनम,चितवलशाह, ओंगोल,नेलीमराला आदि जूट के प्रमुख केन्द्र है।
बिहार:-कटिहार, सहरसा,दरभंगा,पूर्णिया,समस्तीपुर।
उत्तर प्रदेश :- कानपुर, सहजनवां(गोरखपुर)

ऊनी वस्त्र उद्योग :-

●भारत में ऊनी वस्त्र की पहली मिल 1876 में कानपुर में स्थापित की गई थी।
●पंजाब में लुधियाना, जालंधर, धारीवाल, अमृतसर इस उद्योग के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
●भारत में कालीन निर्माण एक प्रमुख कुटीर उद्योग है जिसके प्रमुख केंद्र मिर्जापुर, भदोही, गोपीगंज, शाहजहांपुर, आगरा, जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, अमृतसर,धारीवाल, श्रीनगर, बेंगलुरु, मैसूर आदि हैं।
●पश्मीना ऊन बकरी से प्राप्त होता है।
●अंगोरा ऊन खरगोश से प्राप्त होता है।

चीनी उद्योग :-

●भारत में आधुनिक चीनी उद्योग की शुरुआत 1903 में बिहार से हुई।

●चीनी उद्योग से संबंधित भारत की निम्न राज्य इस प्रकार हैं।
उत्तर प्रदेश :-  देवरिया,गोरखपुर,बस्ती,बलरामपुर, गोंडा, बाराबंकी, सीतापुर बिजनौर, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बुलंदशहर, कानपुर, मुजफ्फरनगर, फैजाबाद, भटनी, पडरौना, गौरी बाजार, सिसवा बाजार  आदि।
बिहार :- समस्तीपर,गोपालगंज ,चंपारण,हसनपुर दरभंगा, डालमियानगर, मोतीपुर, सासामुसा,  नरकटियागंज, चनपटिया, मझौलिया, सुगौली, मोतिहारी आदि।
महाराष्ट्र:-  कोल्हापुर, शोलापुर, पुणे, नासिक, 
मनसद, अहमदनगर,सतारा, सांगली आदि।
प.बंगाल :-  हावड़ा, मुर्शिदाबाद, प्लासी, तेलडांगा ।
पंजाब :- फगवाड़ा, अमृतसर, धुरी, हमीरा ।
हरियाणा :- अंबाला, रोहतक, पानीपत, जगधारी ।
राजस्थान :- गंगानगर, भूपालसागर ।
आन्ध्र प्रदेश :- सीतापुरम, पीठापुरम, बेजवाड़ा, हॉस्पेट, साभल कोट  विशाखापट्टनम।
तमिलनाडु :- तिरुचिरापल्ली, मदुरई, कोयंबटूर, अर्काट।
ओड़िसा :- अस्का, बरगढ़, रायगढ़।

 सीमेंट उद्योग :-

●सीमेंट का आविष्कार 1824 में इंग्लैंड के पोर्टलैंड स्थान पर किया गया था।
●भारत में पहला सीमेंट उद्योग 1904 में चेन्नई में लगाया गया था।
●उत्तर प्रदेश में 4 सीमेंट संयंत्र चुर्क,डल्ला,चुनार डालमिया(दादरी) में अवस्थित है।

भारत के प्रमुख सीमेंट उत्पादक राज्य

उत्तरप्रदेश :- मिर्जापुर,चुर्क।
मध्यप्रदेश :- सतना, जबलपुर, कटनी, रतलाम।
राजस्थान :- लखेरी, जयपुुुर।
पंजाब :- सूरजपुर।
हरियाणा :- चरखी,दादरी।
गुजरात :- पोरबन्दर(द्वारका), सीका(जामनगर),
भावनगर,सेवालियम।
तमिलनाडु :- डालमियापुरम,मधुकराय, तुलकापट्टी
छत्तीसगढ़ :- दुर्ग, जामुल,तिलदा, मंधार,अलकतरा
झारखंड :- खेलारी, कल्याणपुर, जपला,सिंदरी,झींकपानी।
आन्ध्र प्रदेश :- विजयवाड़ा,पनयम,कृष्णामांचेरियल, मछेरिया ।
कर्नाटक :- भोजपुर,भद्रावती, बागलकोट, बंगलुरू।
ओड़िसा :- राजगंगपुर।
केरल :- कोट्टायम।

कागज उद्योग :-

●कागज निर्माण की कला का विकास सबसे पहले चीन में संभवतः 300 ईसा पूर्व में हुआ था।
●देश में कागज का प्रथम आधुनिक कारखाना 1832 ईसवी में श्रीरामपुर पश्चिम बंगाल में स्थापित किया गया था।किंतु यह कारखाना विफल रहा।
●भारत में कागज उद्योग का प्रथम सफल कारखाना 1867 ईस्वी में बालीगंज कोलकाता में लगाया गया था।
●उत्तर प्रदेश में प्रथम कागज कारखाना 1879 में लखनऊ में लगाया गया था।
●पहले कागज उद्योग के सबसे अधिक कारखाने पश्चिम बंगाल राज्य में थे। जहां टीटागढ़, त्रिवेणी, बड़ानगर ,बाबोरिया, नैहाटी आदि प्रमुख केंद्र थे।
वर्तमान में कागज के सर्वाधिक कारखाने महाराष्ट्र में स्थित है।
●मध्यप्रदेश के नेपानगर में अखबारी कागज का कारखाना तथा होशंगाबाद में नोट छापने के कागज बनाने का सरकारी कारखाना है।

रासायनिक उर्वरक उद्योग :-

●देश का प्रथम सुपर फास्फेट उर्वरक कारखाना रानीपेट तमिलनाडु में 1906 में स्थापित किया गया था।
●भारत में सहकारी स्वामित्व वाले पहले उर्वरक कारखाने की स्थापना 1951 में सिंदरी बिहार में की गई थी।
●भारत में प्रति हेक्टेयर उर्वरक खपत में प्रथम स्थान पंजाब का है दूसरा एवं तीसरा स्थान क्रम से आंध्र प्रदेश और हरियाणा का है।
●कोक आधारित उर्वरक इकाइयां तालचर उड़ीसा रामागुंडम आंध्रप्रदेश तथा कोरबा छत्तीसगढ़ में अवस्थित है।
●कोक भट्टियों पर आधारित संयंत्र सिंदरी तथा जमशेदपुर (झारखंड), राउरकेला (उड़ीसा), भिलाई (छत्तीसगढ़), दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) में अवस्थित है।
गैस आधारित यूरिया अमोनिया संयंत्र हाजिरा गुजरात में है।
●उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर एवं जगदीशपुर के कारखाने भी गैस आधारित हैं।
देश का एकमात्र लिग्नाइट आधारित इकाई नेवेली (तमिलनाडु) में अवस्थित है।

रेशम उद्योग :-

●भारत चीन के बाद विश्व का द्वितीय रेशम उत्पादक देश है।
●भारत रेशम की पांच ज्ञात वाणिज्यिक किस्मों मलबरी, ट्रॉपिकलटसर,ओकटसर, इरी और मूंगा का उत्पादन करने वाला एकमात्र राज्य है।
●मूंगा रेशम उत्पादन में भारत को एकाधिकार प्राप्त है।
●कर्नाटक देश का 41% से अधिक कच्चा रेशम उत्पादन करता है। यहां शहतूती (मलबरी) रेशम बनाया जाता है यहां देश का 56% रेशमी धागा बनाया जाता है।
●रेशम उत्पादन में आंध्र प्रदेश 35% के साथ दूसरे स्थान पर है।
●भारत के कुल कपड़ा निर्यात मे रेशमी वस्त्रों का योगदान लगभग 3% है।
●गैर शहतूती रेशम मुख्यतः असम, बिहार और मध्य प्रदेश से प्राप्त होता है।










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