वैदिक युग (वैदिक काल)। vaidik yug । vaidik kaal। vaidik sahitya। upnishad
वैदिक युग (वैदिक काल) :- जिस काल केेे इतिहास की जानकारी हमें वैदिक साहित्यों से प्राप्त होती है। उस काल को वैदिक युग के नाम से जाना जाता है।
वैदिक साहित्य :- इसके अंतर्गत वेद, ब्राह्मण, उपनिषद्, आरण्यक आते हैं।
वर्तमान वैदिक साहित्य संहिता के नाम से जाना जाता है।
● वैदिक युग के निर्माता आर्य थे।
● आर्य संस्कृत भाषा का एक शब्द है जिसका तात्पर्य श्रेष्ठ वंश से,शिष्ट, सज्जन,कुलीन, उत्तम व्यक्ति से है।
वेद :- (श्रुति साहित्य या अपौरुषेय)
वेदों की रचना किसी व्यक्ति विशेष नहीं अपितु ईश्वर के द्वारा किया गया।
वेद का तात्पर्य :- जानना या ज्ञान
वेद प्रायः पद्यों में लिखा गया है।
ब्राह्मण :- ब्राह्मण का तात्पर्य कर्मकांड या विधि विधान से है।
ब्राह्मण साहित्य विशुद्ध रूप से गद्य में लिखा गया है।
आरण्यक :- आरण्यक का तात्पर्य जंगल से है।
वर्तमान में सात आरण्यक उपलब्ध है।
आरण्यक गद्य एवं पद्य दोनों में लिखा गया है।
उपनिषद :- उपनिषद का तात्पर्य- शिष्य द्वारा ज्ञान की प्राप्ति हेतु गुरु के समीप बैठना।
उपनिषद वैदिक साहित्य का अंतिम भाग है। इसलिए इसे वेदांत भी कहा जाता है।
उपनिषद दर्शन पर आधारित पुस्तक है।
उपनिषद का मुख्य विषय दर्शन, ब्रह्मा, अध्यात्म, रहस्यमई बातें हैं।
● श्वेतास्वर उपनिषद में पहली बार मोक्ष की चर्चा मिलती है।
●कुल उपनिषद की संख्या 108 है।
● मुंडकोपनिषद में यज्ञ की तुलना फूटी नाव से हुई है।
● भारत का आदर्श वाक्य सत्यमेव जयते मुंडकोपनिषद से लिया गया है। ( अथर्ववेद का उपनिषद)
● मैत्रिय उपनिषद में त्रिमूर्ति और चातुआश्रम सिद्धान्त का उल्लेख है।
● कठोपनिषद में नचिकेता और यम का संवाद है।
( कठोपनिषद, यजुर्वेद का भाग है।
उपनिषद काल के राजा
उपनिषद में कुछ क्षत्रिय राजाओं के उल्लेख मिलते हैं।
राजा शासक
●राजाजनक विदेह
●प्रवाहण जवाबलि पांचाल
●अश्वपति कैकेय
●अजातशत्रु काशी
वृहदारणयक उपनिषद :-
पुनर्जन्म के सिद्धांत का प्रथम स्पष्ट उल्लेख प्राप्त होता है।
आत्मा के देहांतरण के सिद्धांत का उल्लेख।
ओम शब्द का वर्णन।
विदेह के राजा जनक के दरबार में गार्गी और याज्ञवल्क्य के बीच होने वाले दार्शनिक वाद विवाद आदि का उल्लेख मिलता है।
तैत्तिरीय उपनिषद :-
अन्न को ब्रह्मा कहां गया है। अंबिका का रुद्र की बहन के रूप में उल्लेख मिलता है।
छन्दों उपनिषद :-
प्रथम तीन आश्रमों का उल्लेख है।
छन्दों उपनिषद में उद्वलक,श्वेत उदय व आदुरी का ब्रह्मा और आत्मा के संदर्भ में वार्तालाप तथा श्री कृष्ण का देवकी के पुत्र के रूप में उल्लेख मिलता है।
जबालो उपनिषद :-
सर्वप्रथम चारों आश्रमों का उल्लेख मिलता है।
(ब्रम्हचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यास)
ऐतरेय ब्राह्मण :-
ऐतरेय ब्राह्मण में आठ मंडल पांच अध्याय हैं।
ऐतरेय ब्राह्मण में राज्य अभिषेक के नियम प्राप्त होते हैं।
राजसूय यज्ञ का सर्वप्रथम उल्लेख देवासुर संग्राम का सर्वप्रथम उल्लेख मिलता है।
आश्रम शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग।
पुत्री को कृपण कहां गया।
कन्या को चिंता का कारण बताया गया।
राजस्व की उत्पत्ति का वर्णन।
रूद्र की उत्पत्ति सभी देवताओं के समन्वय से हुई का वर्णन
।
शतपथ ब्राह्मण :-
ऐतिहासिक दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण ब्राह्मण है।
उपनयन संस्कार का विस्तृत विवरण तथा मनु प्रसंग जल प्लावन मत्स्य अवतार की कथा का विवरण।
पुनर्जन्म के सर्वप्रथम सिद्धांत का वर्णन।
हल की जुताई से संबंधित जानकारी।
मृत्यु विषयक चर्चा तथा कृषि की चार क्रियाओं का उल्लेख।
कंधार,कैकेय, शल्य,कुरु, पांचाल,कोशन, विदेह आदि का उल्लेख।
विदेह, माधव की कथा उल्लेखित का वर्णन।
दो समुंद की चर्चा तथा कुरु और पांचाल वैदिक सभ्यता के दो प्रसिद्ध केंद्र का उल्लेख।
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