भारत का भूगोल भाग 13 भारत के जल संसाधन । bharat ke jal sansadhan

 भारत के जल संसाधन । bharat ke jal sansadhan 


विश्व के कुल जल संसाधन का 96.5% जल महासागरों में और 2.5% अलवणीय जल है। विश्व मे अलवणीय जल का 70% भाग अंटार्कटिका, ग्रीनलैंड और पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फ की चादरों और हिमनदो के रूप में मिलता है। जबकि अलवणीय जल का 30% से भी कम जल भूमिगत जल के रूप में पाया जाता है।

यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार :-
विश्व के कुल जल संसाधन का 97.2% जल महासागरों में और 2.2% जल हिमनदियो में बर्फ़ के रूप में तथा .06% भूमिगत और धरातल पर मृदु जल के रूप में विद्यमान है।

●पौधों में 50 से 75% तथा मनुष्य के शरीर में 60 से 65% भाग जल है।
●पृथ्वी के समस्त क्षेत्रफल के लगभग 3/4% भाग पर जल का विस्तार है।
●भारत में प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष जल उपलब्धता के संदर्भ में विश्व में 133 वां स्थान है।
●भारत विश्व की वृष्टि का 4% हिस्सा प्राप्त करता है।
●भारत में कुल नवीनीकरण योग्य जल संसाधन 1897 वर्ग किलोमीटर प्रति वर्ष अनुमानित है।

जल संसाधन के दो प्रमुख स्रोत हैं :-
1.धरातलीय जल(सतही जल) 
2.भूमिगत जल

धरातलीय जल(सतही जल जैसे नदिया,झीलें,तालाब, नहरे) :-
धरातलीय जल जमीन के ऊपर नदियों झीलों और तालाबों के रूप में पाया जाता है। नदियां धरातलीय जल का प्रधान स्रोत हैं।
भारत में मुख्यतः  6 नदी बेसिनो में जल वितरित है :-
1.सिंधु
2.गंगा
3. ब्रह्मपुत्र
4. पूर्वी तट की नदियां
5. पश्चिमी तट की नदियां
6. अन्तः प्रवाही बेसिन

●भारत के प्रमुख नदी बेसिन में ब्रह्मपुत्र बेसिन सर्वोपरि
(वार्षिक वाही),जबकि वाही जल की दृष्टि से गंगा बेसिन द्वितीय स्थान पर है जबकि जल भंडारण की दृष्टि से गंगा बेसिन प्रथम स्थान पर है।

●धरातलीय जल का सबसे ज्यादा दोहन करने वाले राज्य :- पंजाब(94%),हरियाणा(84%),तमिलनाडु(60%), राजस्थान(51%), गुजरात(41%),उत्तर प्रदेश(38%), महाराष्ट्र(31%) आदि।

भूमिगत जल ( जैसे - कुआ,हैंडपंप) :-
सतह के ठीक नीचे के जल को भूजल तथा अत्यधिक गहराई में पाए जाने वाले जल को भूगर्भिक जल या  जीवाश्म जल कहते हैं।

भूमिगत जल की उपलब्धि के आधार पर भारत के तीन क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं 

1.भारत का उत्तरी मैदान (42% जल)
2. प्रायद्वीपीय पठार (बहुत कम जल)
3. तटीय मैदान ( पर्याप्त जल)

●मृदु जल का 97.74% भाग भूमिगत जल के रूप में पृथ्वी की निचली परतों में उपलब्ध है।
●विश्व में होने वाली जलापूर्ति का लगभग 95% भाग भूमिगत जल से ही प्राप्त किया जाता है और शेष 5% जलापूर्ति सतही जल अर्थात नदियों, झीलों, नहरों आदि से होता है।

●R.l. सिंह के अनुसार; देश को 8 भूमिगत जल प्रदेशों में बांटा गया है :-

1.पूरा कैंब्रियन रवेदार शैलो का प्रदेश :-
 इसका विस्तार देश के आधे से अधिक भाग पर जैसे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, दंडकारण्य, बुंदेलखंड, राजस्थान तक है। यहां जल संसाधनों की बेहद कमी है।

2.पूरा कैंब्रियन अवसादी बेसिन :-
यह क्षेत्र कुडप्पा तथा विंध्यन बेसिन तक विस्तृत है। यहां भी भूमिगत जल संसाधनों की कमी है। 

3.गोंडवाना अवसादी बेसिन :-
इसमें गोदावरी तथा बराकर बेसिन सम्मिलित है। यहां पर्याप्त भूमिगत जल संसाधन उपलब्ध हैं।

4.दक्कन ट्रैप प्रदेश :-
यहां 1200 मीटर बेसाल्ट शैलो की परतों के कारण भूमिगत जल की कमी है

5.सीनोजोइक अवसादी बेसिन :-
इसके अंतर्गत तटवर्ती क्षेत्र आंध्र प्रदेश तमिलनाडु केरल गुजरात सम्मिलित हैं।
यहां टर्शियरी शैलो में पर्याप्त भूमिगत जल संसाधन मौजूद है।

6.सीनोजोइक भ्रंश बेसिन :-
इन यहां नर्मदा, ताप्ती तथा पूर्णा के भ्रंश बेसिनो में पर्याप्त भूमिगत जल संसाधन मौजूद है।

7.गंगा ब्रह्मपुत्र बेसिन :- 
इस बेसिन में देश का 42% भूमिगत जल संसाधन उपलब्ध है।

8.हिमालय क्षेत्र :-
जटिल भूगर्भिक संरचना के कारण यहां भूमिगत जल संसाधनों की कमी है।


महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

●केंद्र सरकार ने वर्ष 2013 को जल संरक्षण वर्ष के रूप में मनाया था।
●राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता 1820 घन क्यूबिक मीटर है।
●देश में नदी प्रणाली का औसत प्रवाह 1869 क्यूबिक किलोमीटर अनुमानित है।
●देश में उपयोग में लाए जाने वाला जल संसाधन 1123 क्यूबिक किलोमीटर है।
●देश में सतही जल प्रवाह 690 क्यूबिक किलोमीटर है। भारत में 433 क्यूबिक किलोमीटर भूजल उपलब्ध है ।
●भारत के हिमाचल प्रदेश में भूमिगत जल स्तर सर्वश्रेष्ठ है।
●जवाहरलाल नेहरू ने बहुउद्देशीय परियोजनाओं को आधुनिक भारत के मंदिर की उपमा दी थी।
●तटवर्ती क्षेत्रों में समुद्री जल का अंतः प्रवेश हुआ है। आधुनिक सिंचाई प्रणाली के जनक मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को प्रदान की गई हैं।

●नागपुर स्थित नीरी के अनुसार भारत में उपलब्ध कुल जल का लगभग 70% भाग दूषित हो चुका है
●संयुक्त राज्य संघ ने भारत को पानी की गुणवत्ता और उपलब्धता के मानकों के आधार पर 120 वां स्थान दिया है।
●हमारे देश में 38% शहरों में और 82% गांव में पानी को शुद्ध करने की व्यवस्था नहीं है।
●केंद्रीय जल आयोग की स्थापना 1945 में हुई।
●केंद्रीय जल और विद्युत अनुसंधान केंद्र की स्थापना 1916 में मुख्यालय खड़कवासला पुणे में है।
●केंद्रीय भूजल बोर्ड की स्थापना 1970 में हुई।
●गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग की स्थापना 1972 में (मुख्यालय पटना) में की गई।
●राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान की स्थापना 1978 में रुड़की उत्तराखंड में की गई।
●केंद्रीय जल विकास एजेंसी की स्थापना 1980 में दिल्ली में की गई।






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