भारत का भूगोल (भाग :-17) भारत के खनिज संसाधन और शक्ति संसाधन ।धात्विक खनिज। अधात्विक खनिज । ऊर्जा खनिज शैल तंत्र। आर्कियन क्रम की चट्टाने। धारवाड़ क्रम की चट्टाने। विंध्यन क्रम की चट्टाने । bharat ke khanij sansadhan। shakti sansadhan। dhatvik khanij । adhatvik khanij। urja khanij। shail tantra। arkiyan kram ki chattane etc
भारत के खनिज संसाधन और शक्ति संसाधन ।धात्विक खनिज। अधात्विक खनिज । ऊर्जा खनिज शैल तंत्र। आर्कियन क्रम की चट्टाने। धारवाड़ क्रम की चट्टाने। विंध्यन क्रम की चट्टाने
खनिज :- खनिज प्रकृति में अनेक रूपों में पाए जाते हैं। इसमें कठोर हीरा व नरम चुना तक सम्मिलित है।
खनिज निम्न प्रकार से वर्गीकृत किये जा सकते है।
लौह खनिज :- लौह खनिजो जैसे लौह अयस्क, मैगनीज,क्रोमाइट,कोबाल्ट, टंगस्टन,बोरान, निकिल आदि में लोहा होता है।
A.धात्विक खनिज
B.अधात्विक खनिज
A.धात्विक खनिज :-
●जिन खनिजों से धातुओं की प्राप्ति होती है। धात्विक खनिज कहलाते है। जैसे- लौह अयस्क, बाक्साइड,मैगनीज अयस्क आदि।
●धात्विक खनिजो में धातु कच्चे रूप में होती है।
●धात्विक खनिजो को तीन भागों में बांटा जा सकता है।
(i)लौह खनिज
(ii)अलौह खनिज
(iii)बहुमूल्य धातु
लौह खनिज :- लौह खनिजो जैसे लौह अयस्क, मैगनीज,क्रोमाइट,कोबाल्ट, टंगस्टन,बोरान, निकिल आदि में लोहा होता है।
अलौह खनिज :-
अलौह खनिजो में लोहा नही होता है। जैसे ताँबा,जस्ता,टिन,जिंक,सीसा आदि।
बहुमूल्य धातु :-
सोना,चाँदी, प्लेटिनम आदि बहुमूल्य धातुएँ है।
B.अधात्विक खनिज :-
●जिन खनिजों से धातुओं की प्राप्ति नही होती है। अधात्विक खनिज कहलाते है। जैसे- चूना पत्थर, अभ्रक, जिप्सन आदि।
●खनिज ईंधन जैसे कोयला,पेट्रोलियम भी अधात्विक खनिज कहलाते है।
खनिजों का निष्कर्षण :-
●खनिजों को खनन,प्रवेधन या आखनन द्वारा निष्कासित किया जाता है।
●खनिजों का निष्कर्षण निम्न प्रकार से किया जाता है
1.खनन - (i) विवृत खनन (ii) कूपकी खनन
2.प्रवेधन
3.आखनन
खनन- पृथ्वी की सतह के अंदर दबी शैलो से खनिजों को बाहर निकालने की प्रक्रिया खनन कहलाती है।
विवृत खनन- ऐसे खनिज जो कम गहराई में स्थित है पृथ्वी के ऊपरी पृष्ठीयस्तर को हटाकर निकाले जाते हैं विवृत खनन कहलाते हैं।
कूपकी खनन- गहन वेधन जिसे कूपक कहते है। पृथ्वी के अधिक गहराई में स्थित खनिज निक्षेपो तक पहुंचने के लिए बनाए जाते हैं कूपकी खनन कहलाते हैं।
प्रवेधन- कुछ खनिज पदार्थ जैसे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस धरातल के बहुत नीचे पाए जाते है।इन्हें बाहर निकालने के लिए गहन कूपों की खुदाई की जाती है इसे प्रवेधन कहते हैं।
आखनन- ऐसे खनिज जो सतह के निकट स्थित होते हैं आसानी से खोदकर निकाले जाते हैं इसे आखनन कहते हैं।
C.ऊर्जा खनिज :-
ऊर्जा खनिज के अंतर्गत कोयला,पेट्रोलियम,प्राकृतिक गैस आदि आते हैं। ये जीवाश्म ईंधन कहलाते है।
D.ऊर्जा संसाधन या शक्ति संसाधन :-
ऊर्जा संसाधनों को दो भागों में बांटा जा सकता है:-
(i) ऊर्जा के परंपरागत साधन
(ii) ऊर्जा के गैर परंपरागत साधन
(i)ऊर्जा के परंपरागत साधन(अनवीकरण संसाधन) :-
● ईंधन और जीवाश्म ईंधन परंपरागत ऊर्जा के दो मुख्य स्रोत है।
●जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला,पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस परंपरागत ऊर्जा के मुख्य स्रोत हैं।
●ईंधन जैसे लकड़ी का प्रयोग पकाने के लिए एवं ऊष्मा प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
इन खनिजों के भंडार सीमित मात्रा में है।
(ii)ऊर्जा के गैर परंपरागत साधन(नवीकरण संसाधन) :-
●सौर ऊर्जा,पवन ऊर्जा,परमाणु ऊर्जा,भूतापीय ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा,जल विद्युत ऊर्जा और बायोगैस आदि ऊर्जा के गैर परंपरागत स्रोत है।
शैले :- पृथ्वी की पर्पटी(ऊपरी परत) शैलो से बनी है।
शैलो का निर्माण एक या एक से अधिक खनिजों के मिलने से होता है।
●शैले कठोर,नरम,मुलायम तथा विभिन्न रंगों की हो सकती हैं।
●जैसे ग्रेनाइट कठोर तथा शेलखड़ी नरम होती है।
●पैट्रोलॉजी, शैलो का विज्ञान कहलाता है।
●शैलो को तीन भागों में बांटा जा सकता है।
1. आग्नेय शैल(प्राथमिक शैले व रवेदार शैले)
2. अवसादी शैल(परतदार शैले)
3. कायांतरित शैल(रूपांतरित शैले)
आग्नेय शैल : - आग्नेय चट्टानों का निर्माण क्रस्ट के नीचे उपस्थित तप्त एवं तरल मैग्मा के ठंडा होने से होता है।
●अवसादी व रूपांतरित चट्टान इसी से निर्मित है।
आग्नेय शैल के उदाहरण ग्रेनाइट,बेसाल्ट,डायोराइट,
पेग्माटाइट,गेब्रो,पिचस्टोन आदि है।
●धात्विक खनिज आग्नेय चट्टानों में पाए जाते हैं।
आग्नेय चट्टानों में जीवाश्म नहीं पाए जाते हैं।
अवसादी शैल :- अवसादी चट्टानें परतदार होती हैं। इन चट्टानों में वनस्पति एवंं जीव जंतुओं का जीवाश्म पाया जाता हैं।
●अवसादी चट्टानों में कोयला,खनिजतेल,फास्फेट,सीमेंट बनाने की चट्टान आदि पाए जाते हैं।
अधात्विक खनिज परतदार चट्टानों में पाए जाते हैं।
कायांतरित शैल :- ताप, दाब और रासायनिक क्रियाओं के कारण आग्नेय और अवसादी चट्टानों से कायांतरित चट्टानों का निर्माण होता है।
शैल तंत्र :-
प्रायद्वीपीय भारत की भूगर्भिक चट्टाने तथा इनसे मिलने वाले धात्विक और अधात्विक खनिज निम्नलिखित हैं।
1. आर्कियन क्रम की चट्टाने
2. धारवाड़ क्रम की चट्टाने
3 .कुडप्पा क्रम की चट्टाने
4. विंध्यन क्रम की चट्टाने
5. गोंडवाना क्रम की चट्टाने
6. ढक्कन ट्रैप
आर्कियन क्रम की चट्टाने :-
पृथ्वी पर सबसे पुरानी चट्टानें आर्कियन क्रम की चट्टाने हैं।
धारवाड़ क्रम की चट्टाने :-
●धारवाड़ शैल तंत्र, भारत में पाई जाने वाली आर्थिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण शैले हैं
●भारत की सर्वाधिक महत्वपूर्ण खनिज रॉक तंत्र धारवाड़ तंत्र है।
●भारत की प्रमुख धातुएं सोना,लोहा,मैग्नीज,कोबा ल्ट अभ्रक,तांबा,टंगस्टन,सीसा,क्रो मियम आदि खनिज धारवाड़ क्रम की चट्टानों से प्राप्त होते हैं।
●धारवाड़ क्रम की चट्टानों का नामकरण कर्नाटक के धारवाड़ जिले के नाम पर हुआ है।
●धारवाड़ क्रम की चट्टाने भारत में दो क्षेत्रों कर्नाटक क्षेत्र और अरावली क्षेत्र में पाई जाती हैं।
●कर्नाटक के तीन जिलों धारवाड़, बेल्लारी शिमोगा में धारवाड़ क्रम की चट्टाने पाई जाती है।
●खनिज संसाधनों की संपन्नता की दृष्टि से कर्नाटक का प्रथम स्थान है।
●धारवाड़ क्रम की चट्टानो के अंतर्गत कोलार एवं हट्टी के खानों से सोने की प्राप्ति होती है।
कुडप्पा क्रम की चट्टाने :-
●धारवाड़ क्रम की चट्टानों के बाद कुडप्पा क्रम की चट्टानों का निर्माण हुआ।
●इसका नामकरण आंध्रप्रदेश के कुडप्पा जिले के नाम पर हुआ है। क्योंकि यह चट्टाने आंध्रप्रदेश के कुडप्पा जिले में सबसे पहले प्राप्त हुई थी।
विंध्यन क्रम की चट्टाने :-
●विंध्यन क्रम की चट्टाने परतदार चट्टाने हैं जिनका निर्माण जल निक्षेप द्वारा हुआ है।
●विंध्यन क्रम की चट्टाने भवन निर्माण सामग्री के लिए प्रसिद्ध है।
●विंध्यन क्रम की चट्टानो में बलुआ पत्थर,चूना पत्थर,संगमरमर आदि पाए जाते है।
●चूना पत्थर का विंध्य शैलो में वृहद भंडार है। चूने का पत्थर, सीमेंट उद्योग का आधार है।
●पन्ना की खान(मध्यप्रदेश),गोलकुण्डा की खान(आन्ध्र प्रदेश) विंध्यन क्रम की चट्टानों के अंतर्गत आती हैं।
●इन खानों से हीरा की प्राप्ति होती है।
गोंडवाना क्रम की चट्टाने :-
●गोंडवाना क्रम की चट्टाने नदी घाटियों में पाई जाती हैं।
●गोंडवाना क्रम की चट्टाने प्रमुख रूप से तीन नदी घाटियों गोदावरी नदी घाटी,दामोदर नदी घाटी,महानदी घाटी तक विस्तृत है।
●भारत का लगभग 98% कोयला गोंडवाना क्रम की चट्टानों में ही पाया जाता है।
●झरिया कोयला क्षेत्र दामोदर नदी घाटी ओड़िसा, तलचर कोयला क्षेत्र महानदी घाटी ओड़िसा,सिंगरौली कोयला क्षेत्र गोदावरी नदी घाटी आंध्रप्रदेश में स्थित है।
ढक्कन ट्रैप :-
●ढक्कन ट्रैप का विस्तार महाराष्ट्र (सर्वाधिक), मध्य प्रदेश, गुजरात तक विस्तृत है।
●इनका निर्माण बेसाल्ट चट्टानों से हुआ है ●इन्हीं चट्टानों के अपक्षय और अपरदन से काली मिट्टी का निर्माण हुआ।
●बेसाल्ट चट्टानो का निर्माण लावा के जमाव से हुआ हैं।
A.धात्विक खनिज :-
धात्विक खनिज के अंतर्गत आने वाले खनिज पदार्थ निम्न है :-
लौह अयस्क :-
भारत में लौह अयस्क उत्पादन के चार प्रमुख क्षेत्र हैं
•उत्तर-पूर्वी क्षेत्र जिसमें झारखंड,बिहार,उड़ीसा,प.बंगाल
•मध्य भारत जिसमें मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़,महाराष्ट्र
•प्रायद्वीपीय भारत इसमें कर्नाटक,गोवा,आन्ध्रप्रदेश
•अन्य क्षेत्र जिसमे राजस्थान,गुजरात, हरियाणा आदि सम्मिलित है।
उत्पादन में शीर्ष राज्य- उड़ीसा>छत्तीसगढ़>कर्नाटक> झारखंड
उत्पादन में शीर्ष राष्ट्र-
चीन>ऑस्टेलिया>ब्राजील>भारत
भंडारण में शीर्ष राज्य-
कर्नाटक>उड़ीसा>झारखंड> छत्तीसगढ़>आंध्र प्रदेश
भंडारण में शीर्ष राष्ट्र-
प्रमुख लौह अयस्क उत्पादक क्षेत्र
छत्तीसगढ़-बैलाडिला,डाली राज हरा पहाड़ी
(दुर्ग,दंतेवाड़ा, बस्तर, रायपुर,रायगढ़ बिलासपुर)
राजस्थान- नाथरा की पाल, थूर हुंडेर (उदयपुर)
झारखंड-नोवामंंडी,बदाबुरु, पंसिराबुुरु
(सिंहभूमि,क्योंझर, हजारीबाग, पलामू,धनबाद)
कर्नाटक-बाबाबूदन, कुंद्रेेमुख, बंगारकल, अनादुर्गा
(बेलारी,चित्रदुर्ग, चितलदुर्ग,चिकमंगलूर)
ओड़िसा-गुरुमहिसानी,पोकम्पाद,बदा म पहाड़ी
(मयूरगंज,सुंदरगढ़)
आंध्रप्रदेश-ओंगोल,गुड़लक्कम,दा बली,गुंटूर जिले
गोवा:-अदुलमाले,उसाव, उ0प0 गोवा
तमिलनाडु-सलेम,तरुचिलापल्ली
महाराष्ट्र-रत्नाागिरी,चांदा
प.बंगाल-दामूदा श्रेणी(वर्द्धमान)
मैंगनीज :-
उत्पादन में शीर्ष राज्य-
ओड़िसा> कर्नाटक > मध्यप्रदेश
उत्पादन में शीर्ष राष्ट्र- द. अफ्रीका>चीन>आस्ट्रेलिया
भंडारण में शीर्ष राज्य-ओड़िसा
प्रमुख मैंगनीज उत्पादक क्षेत्र
ओड़िसा-केंद्रझार, कालाहांडी,गंगापुर,बारबिल, धुबना,भूतरा, कुतुंगी(सुंदरगढ़,क्योंझर जिले)
कर्नाटक-संदूर पहाड़ी(बेल्लारी जिला)
मध्यप्रदेश-जमरपानी,टीरोड़ी,पिनि या(बालाघाट जिला)
महाराष्ट्र-डोंगरी,बुजुर्ग, चिरबला
(भंडारा,नागपुर, रत्नागिरी जिले)
आन्ध्रप्रदेश-कोदूर, गारीविदि, धरभम, पेरापी,देवदा,
राधानंदपुरम(विजयनगर जिला)
गोवा-द.गोवा
तांबा
तांबा,आग्नेय और कायांतरित शैलो की परतों से प्राप्त होता है।
उत्पादन में शीर्ष राज्य-
मध्यप्रदेश>राजस्थान>झारखंड
उत्पादन में शीर्ष राष्ट्र-
चिली>चीन>पेरू
भंडारण में शीर्ष राज्य-
राजस्थान>झारखंड>मध्यप्रदेश
भंडारण में शीर्ष राष्ट्र-
चिली>ऑस्ट्रेलिया>पेरू
प्रमुख तांबा उत्पादक क्षेत्र
मध्यप्रदेश-तरेगांव, मलाजखण्ड(बालाघाट जिला)
राजस्थान- खेेतडी या खेत्री,सिंधाना,खोदरियो या खो-दरीबा(अलवर) ,झुंझुनू,जिला)
झारखंड- मोसाबानी, धोबानी, सुरदा, पाथरगोंडा,राखा,सोनामाखी(पुर्वी सिंहभूम)
आन्ध्रप्रदेश-अग्निगुण्डल,गनी, खम्मान(गुुटूर जिला)
सिक्किम- भोटाँग(रांगपो),पांचेयखानी
महाराष्ट्र- चंदरपुर
कर्नाटक- हासन
चांदी
उत्पादन में शीर्ष राज्य-
राजस्थान>कर्नाटक
उत्पादन में शीर्ष राष्ट्र-
मेक्सिको>पेरू>चीन
भंडारण में शीर्ष राज्य-
राजस्थान>कर्नाटक>आन्ध्रप्रदेश> झारखंड>मध्यप्रदेश
भंडारण में शीर्ष राष्ट्र-
पेरू>ऑस्ट्रेलिया>पोलैंड>रूस
प्रमुख चांदी उत्पादक क्षेत्र
राजस्थान- जेवर(उदयपुर)
झारखंड- तूंडू
कर्नाटक- कोलार,हट्टी की खाने
आन्ध्रप्रदेश- रामगिरि
स्वर्ण
उत्पादन में शीर्ष राज्य-
कर्नाटक>आन्ध्रप्रदेश>झारखंड
उत्पादन में शीर्ष राष्ट्र-
चीन>आस्ट्रेलिया>रूस
भंडारण में शीर्ष राज्य-
कर्नाटक>आन्ध्रप्रदेश>झारखंड
भंडारण में शीर्ष राष्ट्र-
आस्ट्रेलिया>द.अफ्रीका>रूस
प्रमुख स्वर्ण उत्पादक क्षेत्र
कर्नाटक- कोलार स्वर्ण एवं हट्टी स्वर्ण क्षेत्र
आन्ध्रप्रदेश- रामगिरी स्वर्ण क्षेत्र
हीरा
●हीरा उत्खनन की दृष्टि से सबसे प्रमुख राज्य मध्यप्रदेश है यहां पन्ना तथा सतना जिले में हीरे की कई महत्वपूर्ण खाने हैं।
● हीरा युक्त किंबरलाइट के वृहद भंडारों की खोज हाल ही में छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के पलाईखंड एवं बेहरादीन और बस्तर जिले में टोकापाल में की गईं।
हीरा उत्पादन में शीर्ष राज्य
मध्यप्रदेश
हीरा भंडारण में शीर्ष राज्य
मध्यप्रदेश>आन्ध्र प्रदेश>छत्तीसगढ़
हीरा भंडारण में शीर्ष राष्ट्र
रूस> कांगो>(किंशासा)> ऑस्ट्रेलिया
हीरा उत्पादन में शीर्ष राष्ट्र
रूस> बोत्सवाना> कांगो
यूरेनियम
उत्पादन में शीर्ष राज्य-
आन्ध्र प्रदेश
उत्पादन में शीर्ष राष्ट्र-
कजाखस्तान> कनाडा>ऑस्ट्रेलिया
भंडारण में शीर्ष राज्य-
आन्ध्र प्रदेश
भंडारण में शीर्ष राष्ट्र-
ऑस्ट्रेलिया> कजाखस्तान> कनाडा
प्रमुख यूरेनियम उत्पादक क्षेत्र
झारखंड- जादूगोड़ा, नारवा पर्वत, केरोआडू पहाड़ी, लोहरदग्गा
राजस्थान-भीलवाड़ा, उदयपुर,रोहेल
आन्ध्रप्रदेश- थुम्बा पल्ली,लम्बापुर,तुम्मलपल्ली
मेघालय- गोमियासांड,दोमाईसाल
कर्नाटक- गोगी
क्रोमाइट
क्रोमाइट लोहे तथा क्रोमियम का ऑक्साइड है।
जो ड्यूनाईट,पेरिडोटाइट,सर्पेंटाइन जैसी आग्नेय शैलो से प्राप्त होता है।
उत्पादन में शीर्ष राज्य
ओड़िसा
उत्पादन में शीर्ष राष्ट्र-
कजाखस्तान
भंडारण में शीर्ष राज्य-
ओड़िसा
भंडारण में शीर्ष राष्ट्र-
कजाखस्तान>द.अफ्रीका>भारत
प्रमुख क्रोमाइट उत्पादक क्षेत्र
ओड़िसा- जाजपुर,धेनकनाल,क्योझर,सुकिंदा घाटी
कर्नाटक- हसन,मैसूर,चितदुग
महाराष्ट्र- भंडारा,रत्नागिरी
बाक्साइड
●बॉक्साइट, एल्युमिनिय का अयस्क है। इसका रंग
लोहांश की मात्रा के आधार पर सफेद,गुलाबी या लाल होता है।
उत्पादन में शीर्ष राज्य-
ओड़िसा>गुजरात>झारखंड>महाराष्ट् र>छत्तीसगढ़
उत्पादन में शीर्ष राष्ट्र-
आस्ट्रेलिया>चीन>ब्राजील
भंडारण में शीर्ष राज्य-
ओड़िसा>आन्ध्रप्रदेश>गुजरात
भंडारण में शीर्ष राष्ट्र-
गिनी>ऑस्ट्रेलिया>वियतनाम
प्रमुख बाक्साइड उत्पादक क्षेत्र
ओड़िसा- पंचपतमाली पहाड़ीया(कोरापुट)
मध्यप्रदेश- अमरकंटक(मंडला)
छत्तीसगढ़- फुटका पहाड़ी(बिलासपुर)
झारखंड- रिचुगुटा(पलामू),बगरु, भूसरा(लोहरदगा)
महाराष्ट्र- छांगड़नगर,तरावाडी(कोल्हापुर)
तमिलनाडु- रकोड़, कोली पहाड़िया(सलेम)
गुजरात- कच्छ,जामनगर
जस्ता(जिंक) व सीसा
●एशिया का श्रेष्ठ जस्ता व सीसा भंडार भीलवाड़ा जिले के रामपुर आगूचा क्षेत्र राजस्थान में है।
● गैलेना,सीसा का प्रमुख खनिज अयस्क है। जो जस्ता और चाँदी के साथ सम्मिलित रहता है।
●स्फेलेराइट जस्ते का प्रमुख स्रोत है। लोहे को जंगरोधी बनाने में इसका प्रयोग होता है।
उत्पादन में शीर्ष राज्य-
राजस्थान
भंडारण में शीर्ष राज्य-
राजस्थान
प्रमुख जस्ता(जिंक) व सीसा उत्पादक क्षेत्र
राजस्थान- रामपुर-आगूचा,राजपुरा देवारी,दरीबा, पुरबनेड़ा,जावर,डूंगरपुर,अलवर,बां सवाड़ा,सिरोही
(उदयपुर,भीलवाड़ा, राजसमंद जिला)
आन्ध्रप्रदेश- अग्निगुण्डाल,बन्दलमोटू(गुंटूर जिला)
ओड़िसा-सारगीपल्ली(सुंदरगढ़ जिला)
सिक्किम-भोटाँग,पाचेयखानी
B.अधात्विक खनिज :-
जिप्सम
उत्पादन में शीर्ष राज्य-
राजस्थान> जम्मू कश्मीर> गुजरात
भंडारण में शीर्ष राज्य-
राजस्थान> जम्मू कश्मीर>तमिलनाडु
प्रमुख जिप्सम उत्पादक क्षेत्र
राजस्थान- हनुमानगढ़,बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर,पाली,जामसर(बीकाने र) आदि।
जम्मू कश्मीर- उरी, बारामूला,डोडा जिले आदि।
तमिलनाडु- कोयम्बटूर, तिरुचिरापल्ली, वंचिंगल जिला
अभ्रक
●अभ्रक, अग्नेय और कायांतरित चट्टानों में खंडों के रूप में पाया जाता है।
अभ्रक के तीन मुख्य किस्में हैं।
•श्वेत अभ्रक या रूबी अभ्रक- उच्च किस्म का अभ्रक
•पीत अभ्रक या फलोगोपाइट
•श्याम अभ्रक या बायोटाइट- इसका रंग गुलाबी होता है।
●भारत की सबसे बड़ी अभ्रक मेखला हजारीबाग,गया और मुंगेर(कोडरमा जिला) में फैली है।
●कोडरमा जिला को अभ्रक की राजधानी कहा जाता है।
●कोडरमा (झारखण्ड) अभ्रक उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र है। इसलिए कोडरमा को माइका सिटी ऑफ़ इंडिया कहा जाता है।
● अभ्रक का मुख्य अयस्क पिग्माटाइट है।
उत्पादन में शीर्ष राज्य-
आन्ध्रप्रदेश>राजस्थान>ओड़िसा> महाराष्ट्र>बिहार>झारखंड
उत्पादन में शीर्ष राष्ट्र-
ब्राजील>चीन>तुर्की
भंडारण में शीर्ष राज्य-
आन्ध्र प्रदेश>राजस्थान>ओड़िसा>महाराष् ट्र>बिहार
प्रमुख अभ्रक उत्पादक क्षेत्र
आन्ध्रप्रदेश- नेल्लोर व खम्मम, गुंटूर
राजस्थान- जयपुर,उदयपुर
झारखंड- हजारीबाग(कोडरमा),सिंहभूमि
बिहार- गया,भागलपुर, मुंगेर
ग्रेफाइट
●ग्रेफाइट कार्बन का खनिज है ग्रेफाइट की प्राप्ति कायांतरित शैलो से होती है।
●ग्रेफाइट को काला शीशा तथा प्लबगो कहा जाता है। ●ग्रेफाइट के साथ सिलका तथा सिलिकेट जैसी अशुद्धियां पाई जाती हैं।
●ग्रेफाइट का उपयोग पेंसिलो की लेड बनाने तथा परमाणु रिएक्टरों में मंदक के रूप में होता है।
उत्पादन में शीर्ष राज्य-
ओड़िसा
उत्पादन में शीर्ष राष्ट्र-
चीन>भारत>ब्राजील
भंडारण में शीर्ष राज्य-
तमिलनाडु> आन्ध्र प्रदेश
प्रमुख ग्रेफाइट उत्पादक क्षेत्र
आन्ध्रप्रदेश- बारंगल,पश्चिम गोदावरी, विशाखापत्तनम
ओड़िसा- कालाहांडी,बोलैंगिरि गंजाम
तमिलनाडु- तिरुनलबैली
संगमरमर
●संगमरमर एक कायांतरित शैल है जो चूना पत्थर के कायांतरण का परिणाम है। कायांतरण की इस प्रक्रिया में मूल चट्टान का पुनः क्रिस्टलीकरण होता है।
●संगमरमर फ़ारसी शब्द है जिसका अर्थ मुलायम पत्थर होता है।
●सर्वोत्तम किस्म का संगमरमर मकराना (सांभर झील के निकट) राजस्थान से प्राप्त किया जाता है।
●इसी मकराना संगमरमर से ताजमहल(आगरा) और विक्टोरिया मेमोरियल (कोलकाता) का निर्माण हुआ है।
C.ऊर्जा खनिज
ऊर्जा के परंपरागत साधन(अनवीकरण संसाधन) :-जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला,पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस परंपरागत ऊर्जा के मुख्य स्रोत हैं।
इन संसाधनों को दुबारा इस्तेमाल नही किया जा सकता है।
कोयला
●अवसादी या परतदार चट्टानों से कोयला, स्लेट,संगमरमर, नमक, पेट्रोलियम, जीवाश्म ईंधन, खनिज-तेल,चूनापत्थर आदि प्राप्त होते है।
●देश के 90% से अधिक कोयला का भंडारण और उत्पादन गोंडवाना कोयला क्षेत्र से होता है।
कार्बन के आधार पर कोयला चार प्रकार का होता है-
1.एंथ्रासाइट-सर्वोत्तम कोयला, कार्बन की मात्रा(90-95%), सर्वाधिक प्राप्ति-जम्मू कश्मीर
2.बिटुमिनस- कोयले का द्वितीय महत्वपूर्ण प्रकार है।
कार्बन की मात्रा(70-90%),भारत मे सर्वाधिक,
गोंडवाना काल का कोयला इसी प्रकार का है।
3. लिग्नाइट(भूरा कोयला)-कार्बन की मात्रा(45-50%),उपयोग- ताप विद्युत में।
4.पीट- सबसे निम्न कोटि का कोयला होता है
कार्बन की मात्रा60%,ऑक्सीजन35%,हाइड्रो जन5%
उत्पादन में शीर्ष राज्य-
छत्तीसगढ़>ओड़िसा>झारखंड>मध्यप् रदेश>तेलंगाना
उत्पादन में शीर्ष राष्ट्र-
चीन>अमेरिका>भारत
भंडारण में शीर्ष राज्य-
झारखंड>ओड़िसा>छत्तीसगढ़>प.बंगाल> आन्ध्रप्रदेश
भंडारण में शीर्ष राष्ट्र-
अमेरिका>चीन>रूस
प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र
जम्मू कश्मीर-कालाकोड
गुजरात- उमरसन
राजस्थान- पालना
मध्यप्रदेश- गोंडवाना
आन्ध्रप्रदेश- सिगनेरी(उच्च किस्म का कोयला)
महाराष्ट्र- वर्धा
छत्तीसगढ़- कोरबा,बिसरामपुुुर
ओड़िसा- तलचर
प.बंगाल- रानीगंज
झारखंड- झरिया,कर्णपुरा
अरुणाचलप्रदेश- नामचिक-नामफुक
तमिलनाडु- नवेली
केरल- बकराला
पांडिचेरी- बाहुर
●कोयला उत्पादक क्षेत्र कोयला खदान
•महानदी घाटी तलचर (ओड़िसा)
•दामोदर घाटी बराकर
• सोन घाटी उमरिया
• गोदावरी घाटी सिंगरेनी(आन्ध्र प्रदेश)
●गोंडवाना युगीन कोयला मुख्यतः बिटुमिनस प्रकार का होता है।इसका उपयोग कोकिंग कोयला बनाकर देश के लौह-इस्पात के कारखाने में किया जाता है।
●देश मे कोयले का लगभग 75% भाग बिजली उत्पादन में खपत होता है।
●देश के कुल कोयला उत्पादन में कोकिंग कोल 9.3% और नान कोकिंग कोल 90.7% है।
●भारत में कोयले की प्राप्ति गोंडवाना युग एवं टर्शियरी काल के चट्टानों से हुई है।
●भारत में सबसे अधिक महत्वपूर्ण गोंडवाना काल की कोयला की चट्टाने हैं।
●देश में टर्शियरी काल का कोयला लगभग 2% और गोंडवाना काल का कोयला 98% पाया जाता है।
●आधुनिक ढंग से भारत में कोयला सर्वप्रथम रानीगंज पश्चिम बंगाल 1744 में निकाला गया था।
●देश का सबसे महत्वपूर्ण एवं विशाल कोयला क्षेत्र ऊपरी दामोदर घाटी का रानीगंज क्षेत्र पश्चिम बंगाल है
●टर्शियरी युगीन कोयले का प्रमुख क्षेत्र माकूम(असम),नबेली(तमिलनाडु), पलना(राजस्थान) है।
●भारत में लिग्नाइट कोयले का सर्वाधिक भंडार मन्नारगुड़ी(तमिलनाडु) में है।
●भारत में कोयला दो क्षेत्रों में विशेष रूप से पाया जाता है।
•गोंडवाना क्षेत्र
•तृतीय कल्प क्षेत्र
●गोंडवाना क्षेत्र का कोयला उच्च कोटि का होता है। इसमें सल्फर(गंधक) की मात्रा न्यूनतम होती है। इस क्षेत्र से सर्वाधिक बिटुमिनस कोयले की प्राप्ति होती है। इसमें राख की मात्रा अल्प तथा शक्ति अधिक होती है।
●तृतीय कल्प क्षेत्र का कोयला घटिया किस्म का होता है। इसमें गंधक(सल्फर) की प्रचुरता होने के कारण उद्योगों के लिए प्रयुक्त नहीं होता है।
● योजना आयोग के अनुसार भारत का पेट्रोलियम भंडार 22 वर्षों में, गैस भंडार 30 वर्षों में, कोयला भंडार 80 वर्षों में समाप्त हो जाएगा। कोयला भंडार में नानकोकिंग कोल के संचित भंडार भारत में कम है।अतः यह जल्दी ही समाप्त हो जाएगा।
● भारत में कोयले का सर्वाधिक उपयोग ऊर्जा उत्पादन में होता है।
● भारत का ऊर्जा उत्पादन में सर्वाधिक योगदान उष्मीय थर्मल ऊर्जा (कोयले) का है।
● शक्ति के उत्पादन में ऊर्जा स्रोतों का क्रम :-
तापीय ऊर्जा>जलीय ऊर्जा>पवन/वायु ऊर्जा> आणविक ऊर्जा।
प्रमुख कोयला क्षेत्र
1.गोंडवाना कोयला क्षेत्र :-
इसके अंतर्गत दामोदर घाटी (छोटा नागपुर क्षेत्र) के निम्न कोयला क्षेत्र आते है।
●रानीगंज कोयला क्षेत्र :-
•रानीगंज कोयला क्षेत्र(प.बंगाल) ऊपरी दामोदर घाटी में स्थित है।इस क्षेत्र से देश का 35% कोयला प्राप्त होता है।
•झरिया कोयला क्षेत्र झारखंड के धनबाद जिले में स्थित है।
•कोकिंग कोयले के 90% भंडार झरिया में स्थित है।
•सुदामडीह और मोनीडीह में कोयला धोवन शालाएं स्थित है।
●महानदी घाटी कोयला क्षेत्र :-
इसके अंतर्गत मध्यप्रदेश के सोनहट,विश्रामपुर लखनपुर क्षेत्र,उड़ीसा के तलचर और संभलपुर क्षेत्र आते हैं।
●सोन घाटी कोयला क्षेत्र :-
इसके अंतर्गत मध्यप्रदेश के सोहागपुर,उड़ीसा के औरंगा, हुटार क्षेत्र आते हैं।
●करनपुरा क्षेत्र :-
यह क्षेत्र ऊपरी दामोदर घाटी में स्थित है।
बोकारो क्षेत्र :-
बोकारो कोयला क्षेत्र हजारीबाग में स्थित है।
●गिरिडीह क्षेत्र :-
इस क्षेत्र में उत्तम प्रकार का स्टीम कोक तैयार किया जाता है। यह क्षेत्र झारखंड में स्थित है।
●कोरबा क्षेत्र (छत्तीसगढ़) :-
तातापानी- रामकोला कोयला क्षेत्र कोरबा क्षेत्र में स्थित है।
इस क्षेत्र के कोयले का उपयोग भिलाई के इस्पात कारखाने में होता है।
तलवर की खाने ब्राह्मणी नदी की घाटी में है।
2.टरशियरी कोयला क्षेत्र :-
●टरशियरी कोयला क्षेत्र उत्तर-पूर्व राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम,मेघालय, नागालैंड और राजस्थान, जम्मू कश्मीर, तमिलनाडु में पाया जाता है।
●भारत का 2% कोयला टरशियरी युग की चट्टानों से प्राप्त होता है।
●राजस्थान में लिग्नाइट कोयले के भंडार पलाना,बरसिंगसर, बिथनोक(बीकानेर)में जलिप्पा, कपूरड़ी(बाड़मेर)में कसनऊ-इग्यार(नागौर)में है।
●लिग्नाइट कोयले का सबसे ज्यादा भंडार और उत्पादन तमिलनाडु में होता है।
●तमिलनाडु के मन्नारगुड़ी में लिग्नाइट कोयले का सर्वाधिक भंडार स्थित है।
●तमिलनाडु के नवेली नामक स्थान से भी लिग्नाइट कोयले का भंडार मिलता है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस :-
●भारत में कोयले के बाद दूसरा प्रमुख साधन पेट्रोलियम या खनिज-तेल है।
●भारत मे अधिकांश पेट्रोलियम की प्राप्ति टरशियरी युग की शैल संरचनाओं के अपनति व भ्रंश ट्रैप से होती है।
●तेल धारक परत सरंध्र चूना पत्थर या बलुआ पत्थर होता है। जिसमे से तेल प्रवाहित होता है।
●पेट्रोलियम सरंध्र और असरंध्र चट्टानों के बीच भ्रंश ट्रैप में भी पाया जाता है।
●पेट्रोलियम से विभिन्न तरह के उत्पाद जैसे- पेट्रोल, डीजल,मिट्टी का तेल,मोम, प्लास्टिक और स्नेहक़ तैयार किये जाते है।
●पेट्रोलियम और इससे बने उत्पाद को काला सोना कहते है।
●भारत मे अवसादी बेसिनों का विस्तार 720 मिलियन वर्ग किमी क्षेत्र पर है। जिसमे 3.2 मिलियन वर्ग किमी का महाद्वीपीय तट क्षेत्र सम्मिलित है। इन बेसिनों में 62 बिलियन टन हाइड्रो-कार्बन के भंडार अनुमानित किये गए है।
●हाइड्रो-कार्बन में सामान्यतः 70% तेल और 30% प्राकृतिक गैस प्राप्त होती है।
●अंकलेश्वर गुजरात तेल क्षेत्र,असम सबसे पुराना तेल उत्पादक राज्य,डिगबोई, नहरकटिया,मोरन-हुगरीजन,मुंबई में बाम्बे हाई, कृष्णा और गोदावरी नदियों के डेल्टा आदि महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्र है।
● मंगला भाग्यम, शक्ति एवं ऐश्वर्य बाड़मेर सांचौर बेसिन में खोजे गए प्रमुख तेल क्षेत्र हैं।
● हाइड्रोजन विजन 2025 पेट्रोलियम उत्पाद के भंडार से संबंधित है।
शीर्ष पेट्रोलियम उत्पादक राज्य
राजस्थान>गुजरात>असम>आन्ध्र प्रदेश
●भारत के चार महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्र :-
1. ब्रह्मपुत्र घाटी
2. गुजरात का तटीय क्षेत्र
3. पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र
4. पूर्वी अपतटीय क्षेत्र
ब्रह्मपुत्र घाटी :-
●ब्रह्मपुत्र घाटी देश की सबसे पुरानी तेल की पेटी है। ●जो दिहिंग घाटी से सुरमा घाटी तक विस्तृत है।
●भारत में सर्वप्रथम खनिज तेल का कुआं ऊपरी असम के माकूम क्षेत्र में 1867 में खोदा गया था।
●उसके बाद डिगबोई में 1889 में तेल कुएं की खुदाई की गई।
●डिगबोई, नहरकटिया,हुगरीजन-मोरन, सुरमाघाटी,लकवा, रुद्रसागर आदि प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्र है।
गुजरात का तटीय क्षेत्र :-
गुजरात राज्य के अंतर्गत दो प्रमुख तेल क्षेत्र है।
•अंकलेश्वर(भरूच जिला)
•खम्भात(गान्धार क्षेत्र)
जबकि लुनेज पेट्रोल क्षेत्र, नवगांव, कोसम्बा,ढोलका,ओलपाद मेहसाना,बचारजी, कलोल,सानन्द नदी घाटी,कदी,कठाना, बारकोल,भावनगर से कुछ दूर एलियाबेट द्वीप,आदि भी गुजरात के प्रमुख तेल क्षेत्र है।
पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र :-
इसके अंतर्गत तीन तेल क्षेत्र सम्मिलित है।
इस क्षेत्र से कच्चे तेल उत्पादन का लगभग 54% भंडार पाया जाता हैं।
1.बम्बई-हाई तेल क्षेत्र :-
●देश का विशालतम तेल उत्पादक क्षेत्र है।बाम्बे हाई तेल क्षेत्र मुम्बई के तट से 160km की दूरी पर स्थित है।
●इस तेल क्षेत्र की खोज 1964-67 के मध्य रूस एवं भारत के संयुक्त टीम द्वारा किया गया था।
●इसका नामकरण 1965 में किया गया।बाम्बे-हाई में पहला तेल कुआँ 1974 में खोदा गया था।
2.बसीन तेल क्षेत्र :-
बम्बई हाई के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।
3.अलियाबेट तेल क्षेत्र :-
खम्भात की खाड़ी गुजरात मे स्थित है।
पूर्वी अपतटीय क्षेत्र :-
●गोदावरी-कृष्णा घाटी के अपतटीय(रवा) एवं अभितटीय दोनों भागो में तेल पाया जाता है।●अभितटीय क्षेत्र में इसका विस्तार गोदावरी (आन्ध्र प्रदेश) से तंजावुर(तमिलनाडु) और अपतटीय क्षेत्र में रवा क्षेत्र, अमलापुरु(आन्ध्र प्रदेश) तक है।
●अन्य तेल क्षेत्र नारिमानम तथा कोइरकलापल्ली(कावेरी बेसिन) में स्थित है।
●पनाइगुडि (चेन्नई)में अशुद्ध तेल को साफ किया जाता है।
●केयर्न एनर्जी एवं ONGC कंपनियों द्वारा राजस्थान के बाड़मेर जिले में मंगला,भाग्यम, एश्वर्य नामक तेल क्षेत्रों की खोज की गईं है।
●दक्षिण चीन सागर में तेल एवं गैस की खोज के लिए ONGC ने वियतनाम की कंपनी पेट्रो वियतनाम से समझौता किया है।
तेल शोधक शालाएं :-
●देश मे कुल 22 तेल शोधक कारखाने कार्यरत है।
इनमे से 17 सार्वजनिक क्षेत्र में 2 संयुक्त क्षेत्र में ,3 निजी क्षेत्र में कार्यरत है।
●सार्वजनिक क्षेत्र के 17 तेल शोधक कारखानो में से आठ का स्वामित्व इंडियन ऑयल कारपोरेशन लि., भारत पेट्रोलियम के पास दो,तेल और प्राकृतिक गैस लि., के पास दो,चेन्नई पेट्रोलियम के पास दो,हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन के पास दो,नूमालीगढ़ रिफाइनरी लि. के पास एक,निजी क्षेत्र में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास दो, तथा एस्सार ऑयल लि. के पास एक का स्वामित्व है।
तेल शोधक कारखाने :-
1.सार्वजनिक क्षेत्र
•इंडियन ऑयल कार्पो.लि.(IOCL) गुवाहाटी(असम)
•इंडियन ऑयल कार्पो.लि.(IOCL) बरौनी(बिहार)
•इंडियन ऑयल कार्पो.लि.(IOCL) कोयली(गुजरात)
•इंडियन ऑयल कार्पो.लि.(IOCL) हल्दिया(प.बंगाल)
•इंडियन ऑयल कार्पो.लि.(IOCL) मथुरा(उ0प्र0)
•इंडियन ऑयल कार्पो.लि.(IOCL) डिगबोई(असम)
•इंडियन ऑयल कार्पो.लि.(IOCL) पानीपत(हरियाणा)
•इंडियन ऑयल कार्पो.लि.(IOCL) बोंगाईगांव
•हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कार्पो.लि.(HPCL) मुम्बई
•हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कार्पो.लि.(HPCL) विशाखापटन(आन्ध्र प्रदेश)
•भारत पेट्रोलियम कार्पो.लि.(BPCL) कोचिन(केरल)
•भारत पेट्रोलियम कार्पो.लि.(BPCL) मुम्बई
•चेन्नई पेट्रोलियम कार्पो.लि.(CPCL) मनाली
•चेन्नई पेट्रोलियम कार्पो.लि.(CPCL) नागापट्टनम(तमिलनाडु)
•नूमालीगढ़ रिफाइनरी लि. असम(गोलाघाट)
•मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रो केमिकल्स लि. मंगलोर(कर्नाटक)
•तेल एंड प्राकृतिक गैस लि. ताटीपका(आन्ध्र प्रदेश)
2.संयुक्त उद्यम क्षेत्र :-
•भारत ओमान रिफाइनरी लि. बीना
•HPCL व आर्सेलर मित्तल समूह लि. भटिंडा (पंजाब)
3.निजी क्षेत्र :-
•रिलायंस इंडस्ट्रीज लि. (RPL) मोती खावड़ी (जामनगर, गुजरात)
•रिलायंस पेट्रोलियम लि.(SEZ) एस. ई. जेड. (जामनगर)
•एस्सार ऑयल लि.(EOL) वादीनार
●देश की प्रथम तेल शोधशाला डिगबोई(1893) है।
●ONGC का नया नाम तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम है।
●भारत की सबसे बड़ी व्यापारिक एवं खनिज निर्यातक कम्पनी मिनरल्स एंड मेटल्स कार्पो. (M.M.T.C.) है।
●देश की प्रथम पाईप लाईन नाहरकाटिया-नूनमाटी- बरौनी है।
● भारत में तेल अन्वेषण का कार्य ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड द्वारा किया जाता है।
● देश को कच्चे तेल की आपूर्ति में रुकावट से पृथक रखने हेतु भारत ने इंडिया स्ट्रेटजिक रिजर्व लिमिटेड की स्थापना की है इसमें तीन स्थान विशाखापट्टनम मंगलोर तथा पादुर का चयन किया गया है।
●14 NELP ब्लॉक्स,1 जे. वी. ब्लॉक्स, 2 नॉमिनेशन ब्लॉक्स,4 सी.बी.एम.ब्लॉक्स पेट्रोलियम अन्वेषण से संबंधित है।
तेल शोधक इकाई चालू होने का वर्ष
•डिगबोई(असम) 1901
•कोयली(गुजरात) 1965
•हल्दिया(प.बंगाल) 1975
•मथुरा(उत्तर प्रदेश) 1982
● भारत में सर्वप्रथम ऊर्जा संकट वर्ष 1973 में पैदा हुआ था। जब तेल निर्यातक देशों ओपेक ने तेल की कीमतों में अकस्मात 4 गुना से अधिक वृद्धि कर दी थी।
प्राकृतिक गैस :-
●प्राकृतिक गैस पेट्रोलियम निक्षेपो के साथ पाई जाती है।
●जब कच्चे तेल को धरातल से निकला जाता है तो प्राकृतिक गैस निर्मुक्त हो जाती है।
●प्राकृतिक गैस पेट्रोलियम कुआँ से निकलता है।
इसमें 95% हाइड्रोकार्बन होता है जिसमे 80% मिथेन पाया जाता है।
●घरो में प्रयुक्त होने वाले द्रवित प्राकृतिक गैस को LPG कहते है यह ब्यूटेन और प्रोपेन का मिश्रण होता है।
●जिसे उच्च दाब पर द्रवित कर सिलेंडरो में भर दिया जाता है।
●कृष्णा-गोदावरी नदी बेसिन में प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार खोजे गए है।
●पश्चिमी तट, मुम्बई-हाई,
खम्भात की खाड़ी,अंडमान निकोबार द्वीपसमूह,जैसेलमेर, त्रिपुरा,केजी-डी-6 बेसिन(कृष्णा-गोदावरी बेसिन और बंगाल की खाड़ी के क्षेत्र में विस्तृत एक क्रैटोनिक भ्रंश है) आदि में प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार पाए जाते है।
●गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (GAIL) की स्थापना 1984 में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम के रूप में प्राकृतिक गैस के परिवहन एवं विपणन के लिए की गई थी।
●एच.बी.जे.पाइपलाइन द्वारा प्राकृतिक गैस का परिवहन दक्षिणी बेसिन(बाम्बे हाई का अपतटीय क्षेत्र)
से किया जाता है।
● उड़ान महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित गैस आधारित शक्ति परियोजना है।
भारत मे प्राकृतिक गैस का उत्पादन
अपतटीय क्षेत्र बम्बई-हाई>असम>गुजरात>आन्ध्र प्रदेश>तमिलनाडु>त्रिपुरा>राजस् थान
भारत मे प्राकृतिक गैस का भंडारन
मुम्बई हाई>गुजरात>असम>तमिलनाडु>त्रिपु रा
विश्व मे प्राकृतिक गैस का उत्पादन
तापीय विद्युत :-
●ताप विद्युत भारत मे ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है।
●ताप विद्युत का उत्पादन कोयला,डीजल तथा प्राकृतिक गैस का उपयोग करके किया जाता हैै।
●तापीय विद्युत को प्रोत्साहन देने के लिए 1975 में राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम(नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेसन) NTPC की स्थापना की गई। इसका मुख्यालय नई दिल्ली है।
●हिमांचल प्रदेश,जम्मू कश्मीर,केरल,गोआ, सिक्किम में ताप विद्युत का अभाव है।
● एनटीपीसी फरक्का ताप विद्युत केंद्र पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में स्थित है।
● तमिलनाडु में स्थित नेवेली ताप विद्युत संयंत्र लिग्नाइट कोयले पर अधिकार दक्षिण पूर्वी एशिया का प्रथम संयंत्र है लिग्नाइट टर्शियरी कोयला तृतीयक कोयला भी कहलाता है।
● ओबरा ताप विद्युत केंद्र की स्थापना उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में रूसी इंजीनियरों के सहयोग से हुई थी।
●टाटा एकीकृत इस्पात संयंत्र परियोजना जॉजपुर (उड़ीसा) में स्थित है।
●जामनगर बिजली संयंत्र एस्सार पावर द्वारा संचालित होता है।
● नबीनगर बिजली संयंत्र परियोजना बिहार में भारतीय रेल बिजली कंपनी के द्वारा संचालित होती है। इस संयंत्र में NTPC की 49% भागीदारी है।
● कयमकुलम बिजली संयंत्र केरल में एनटीपीसी के द्वारा संचालित होती है
प्रमुख ताप विद्युत केंद्र
उत्तरप्रदेश :- ओबरा(1971), सिंगरौली,औरैया, ऊंचाहार, हरदुआगंज, रिहंद पनकी, कानपुर,परिच्छा आदि।
गुजरात :- गांधीनगर,साबरमती,अहमदाबाद,
वनकबोरी(कोयलाआधारित),धुवरण,का वस,झनोर,
उटरन,उकाई आदि।
महाराष्ट्र :-उड़ान,बल्लारशाह,चन्द्रपुुुर, चोला, ट्रांबे नासिक,पारली,मुसावल,खापरखेड़ा, कराडी,पारस,
डाभोल आदि।
आन्ध्र प्रदेश :- रामागुंडम(वर्तमान तेलंगाना),नैल्लोर, विजयवाड़ा, कोठगुदम(वर्तमान ते लंगाना), श्री सेलम जलविद्युत परियोजना आदि।
मध्यप्रदेश :- सतपुड़ा,अमरकंटक, गादरवारा(NTPC+राज्य सरकार)
तमिलनाडु :- नेवेली, तूतीकोरिन,एन्नौर, मेटूर आदि।
बिहार एवं झारखंड :- पतरातू(झारखंड),बरौनी,
बोकारो ताप विद्युत केंद्र (झारखंड) में कोनार बांध दामोदर नदी पर है।
राजस्थान :- सूरतगढ़, अन्ता, कोटा आदि।
दिल्ली :- बदरपुर, राजघाट, इन्द्रप्रस्थ आदि।
पंजाब :-भटिंडा।
हरियाणा :- फरीदाबाद, पानीपत।
ओड़िसा :- तलचर, तलचर कनिहा।
प.बंगाल :- दुर्गापुर,गौरीपुर,टीटागढ़, संतलडीह, कोलकाता, बुंदेल आदि।
छत्तीसगढ़ :- कोरबा,लारा(NTPC+राज्य सरकार)
असम :- नामरूप,चन्द्रपुुुर, बोंगाईगांव आदि।
केरल :- कायाकुलम
त्रिपुरा :- पालटाना (ONGC की पहली विद्युत परियोजना)
कर्नाटक :- रायचूर (कोयला आधारित)
शीर्ष ताप विद्युत स्थापित क्षमता वाले राज्य
महाराष्ट्र>गुजरात>आन्ध्रप्रदे श>उत्तर प्रदेश>प.बंगाल
शीर्ष ताप विद्युत उत्पादन राज्य
उत्तरप्रदेश>गुजरात>महाराष्ट्र> आन्ध्रप्रदेश>छत्तीसगढ़
NTPC की कोयले पर आधारित प्रमुख ताप विद्युत परियोजना
सिंगरौली उत्तरप्रदेश (सोनभद्र)
रिहन्द उत्तरप्रदेश (सोनभद्र)
दादरी उत्तरप्रदेश (गौतमबुद्ध नगर)
टांडा उत्तरप्रदेश (अम्बेडकर नगर)
ऊँचाहार उत्तरप्रदेश (सोनभद्र)
कोरबा छत्तीसगढ़
रामागुंडम आन्ध्र प्रदेश (करीमनगर)
सिम्हाद्री आन्ध्र प्रदेश(विशाखापटनम)
फरक्का प.बंगाल(मुर्शिदाबाद)
विंध्याचल मध्यप्रदेश
कहलगांव बिहार(भागलपुर)
तलचर ओड़िसा(अंगुल)
बदरपुर दिल्ली
NTPC की गैस आधारित प्रमुख ताप विद्युत परियोजना
अंता राजस्थान(बारां)
औरेया उत्तरप्रदेश
दादरी उत्तरप्रदेश(गौतमबुद्ध नगर)
कवास गुजरात(सूरत)
गंधार गुजरात(भड़ौच)
मैथान बिहार
कैथलगुडी असम
अगरतला त्रिपुरा
परमाणु ऊर्जा अथवा आणविक ऊर्जा अथवा नाभकीय ऊर्जा या गुरुजल सयंत्र :-
(Nuclear or Atomic Energy)
●परमाणु अथवा आणविक ऊर्जा अणुओं की संरचना को बदलने से प्राप्त होता है।
●ऐसे परिवर्तन से ऊष्मा के रूप में काफी ऊर्जा निकलती है जिससे विद्युत ऊर्जा को उत्पन्न किया जाता है।
●यूरेनियम तथा थोरियम का प्रयोग परमाणु ऊर्जा अथवा आणविक ऊर्जा अथवा नाभकीय ऊर्जा के उत्पादन में किया जाता है।
●यूरेनियम निक्षेप धारवाड़ शैलो में पाए जाते हैं।
●यूरेनियम अयस्क राजस्थान के उदयपुर,झुंझुनू,अलवर जिले मध्यप्रदेश के दुर्ग जिले महाराष्ट्र के भंडारा जिले जिले हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में पाई जाती है।
●यूरेनियम और थोरियम के भंडार झारखंड और राजस्थान के अरावली पर्वत श्रृंखला में पाए जाते है।
केरल के तटीय क्षेत्र की पुलिन बीच की बालू में मोनाजाइट एवं इल्मेनाइट से थोरियम प्राप्त किया जाता है।
●विश्व के सबसे अच्छे मोनाजाइट निक्षेप केरल के पालाक्काड तथा कोलाम जिलो, आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम, ओडिशा में महानदी के डेल्टा में पाए जाते हैं।
●परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना 1948 में परमाणु शक्ति के जनक डॉ. होमी जे.भाभा के निर्देशन में किया गया।
●परमाणु ऊर्जा विभाग की स्थापना 1954 में किया गया। इसी वर्ष ट्राम्बे में परमाणु ऊर्जा संस्थान स्थापित किया गया।
●परमाणु ऊर्जा संस्थान का नाम बदलकर 1967 में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र(BARC) रखा गया।
●भारतीय परमाणु विद्युत निगम लिमिटेड(NPCIL) का गठन 1987 में किया गया।
●तथा इसे देश के समस्त परमाणु संयंत्रों के प्रारूप, निर्माण कार्य संचालन एवं उत्पादन संबंधित उत्तरदायित्व को सौंपा गया।
●परमाणु विद्युत क्षमता देश की कुल अधिस्थापित विद्युत क्षमता का 3% हो गई है।
●भारत में परमाणु शक्ति के विकास के लिए अनेक अनुसंधान रिएक्टर बनाए गए हैं इनमें अप्सरा-1 (1956), साइरस (1960 अब बंद), जर्लिना(1961) पूर्णिमा-1 (1972), पूर्णिमा-2(1984), ध्रुव(1985),* कामिनी तथा पूर्णिमा-3 (1990) सम्मिलित है।
●भारत में तीन शताब्दी से अधिक समय तक परमाणु ऊर्जा की आवश्यकता की पूर्ति के लिए थोरियम के पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।
महत्वपूर्ण नाभिकीय ऊर्जा परियोजनाएं
●तारापुर महाराष्ट्र
(1969 में अमेरिका की सहायता से स्थापित देश का प्रथम परमाणु शक्ति केन्द्र तारापुर है।)
●रावतभाटा राजस्थान कोटा के पास
(कनाडा की सहायता से स्थापित, भारत का 25वां सयंत्र है)
●कलपक्कम तमिलनाडु
(दो स्वदेशी रिएक्टर 1984 तथा 1986 में स्थापित)
●नरोरा उत्तर प्रदेश
(दो स्वदेशी रिएक्टर 1989 तथा 1991 में स्थापित)
●कैगा कर्नाटक
(दो स्वदेशी रिएक्टर 1999 तथा 2000 में स्थापित,भारत का 20वां परमाणु सयंत्र)
●काकरापाड़ा गुजरात
(दो स्वदेशी रिएक्टर 1992 तथा 1995 में स्थापित)
●कुण्डनकुलम तमिलनाडु
(रूस के साथ मिलकर 6 इकाई स्थापित)
●जैतापुर(रत्नागिरी) महाराष्ट्र
(फ्रांस की अरेबा कंपनी के सहयोग से स्थापित)
●गोरखपुर-हरियाणा विद्युत परियोजना की स्थापना
फतेहाबाद(हरियाणा)2014 में मनमोहन सिंह द्वारा हुआ था।
● थाल गुरु जल संयंत्र महाराष्ट्र में स्थित है।
● मानूगुरु जल संयंत्र आंध्र प्रदेश वर्तमान में तेलंगाना के खम्मम जिले में स्थित है।
● रावतभाटा जल विद्युत संयंत्र को राणा प्रताप सागर विद्युत संयंत्र के नाम से जाना जाता है।
● कोयना जलविद्युत संयंत्र महाराष्ट्र राज्य मे कोयना नदी पर निर्मित बांध है इसके पीछे शिवाजी सागर झील का निर्माण हुआ है।
भारत में आठ भारी जल संयंत्र
●भारी जल का प्रयोग दाबित भारी जल रिएक्टरों में मॉडरेटर तथा कूलैंट के रूप में होता है।
•नांगल(1978)
•बड़ोदरा(1980)
•तूतीकोरन(1978)
•कोटा(1985)
•तलचर(1985)
•थाल महाराष्ट्र(1987)
•हाजिरा(1991)
•मानुगुरु आन्ध्र प्रदेश(1991)
विश्व के शीर्ष नाभिकीय विद्युत उत्पादन देश
अमेरिका>फ्रांस>रूस>कोरिया>जर् मनी
C. ऊर्जा खनिज :-
ऊर्जा के गैर परंपरागत साधन(नवीकरण संसाधन) :-
●गैर परंपरागत ऊर्जा नवीनीकरण ऊर्जा है। जो
सौर ऊर्जा,पवन ऊर्जा,भूतापीय ऊर्जा,ज्वारीय ऊर्जा,जल विद्युत ऊर्जा और बायोगैस आदि स्रोतो से प्राप्त होती है।
●इन संसाधनों को दुबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
●नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय अक्षय ऊर्जा से संबंधित सभी मुद्दों पर भारत सरकार का एक शीर्ष मंत्रालय है।
●मंत्रालय का लक्ष्य देश में ऊर्जा संबंधित जरूरतों की प्रतिपूर्ति के लिए अक्षय ऊर्जा विकसित करना है।
सौरऊर्जा(Solar Energy)
●सौर ऊर्जा, सूर्य से प्राप्त शक्ति को कहते हैं। इस ऊर्जा को ऊष्मा या विद्युत में बदलकर अन्य प्रयोगों में लाया जाता है।
●सौर ऊर्जा को काम में लाने के लिए दो प्रक्रमों को प्रभावी माना जाता है।
•फोटोवोलटाइक
•सौर तापीय प्रौद्योगिकी
●फोटोवोलटाइक प्रौद्योगिकी द्वारा धूप को सीधे विद्युत में परिवर्तित किया जाता है।
●विश्व के कुल उत्पादन में सौर ऊर्जा का योगदान
0.41% है।
●विश्व का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र अमेरिका के कैलिफोर्निया के मोजावे मरुस्थल में स्थित SEGS संयंत्र है।
●विश्व का सबसे बड़ा फोटोवोल्टेयिक पावर स्टेशन अमेरिका का अक्वाकैलिंटे परियोजना है इसके पश्चात भारत का चरंगा सौर पार्क गुजरात का स्थान है।
● सौर ऊर्जा प्लांट लगाने वाला देश का प्रथम गांव रामपुरा उत्तर प्रदेश में स्थित है।
पवन ऊर्जा :-
●पवन की गतिज ऊर्जा को टरबाइन के माध्यम से यांत्रिक अथवा विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है।
●भारत में पवन ऊर्जा फार्म के विशालतम पेटी तमिलनाडु में नागरकोइल से मदुरई तक अवस्थित है।
नागरकोइल और जैसलमेर देश में पवन ऊर्जा के प्रभावी प्रयोग के लिए जाने जाते हैं।
● पनागुड़ी तमिलनाडु में स्थित पवन चक्कियों एवं रॉकेट इंजन प्लांट(LPSC) के लिए प्रसिद्ध है।
शीर्ष पवन ऊर्जा उत्पादक राज्य
तमिलनाडु>महाराष्ट्र(सतारा)>कर् नाटक>
राजस्थान>गुजरात
बायोगैस ऊर्जा :-
●बायोगैस कृषि अपशिष्ट,पशुओं एवं मानव जनित अपशिष्ट, रसोई के अपशिष्ट, नगरी अपशिष्ट तथा फसलों के अवशेष पदार्थों से प्राप्त किया जा सकता है।
●पशुओं का गोबर प्रयोग करने वाले संयंत्र ग्रामीण भारत में गोबर गैस प्लांट के नाम से जाने जाते हैं।
●गोबर गैस प्लांट या बायो गैस प्लांट किसान को दो तरह से लाभान्वित करते हैं ऊर्जा के रूप में, उर्वरक के रूप में।
●इससे देश की 50% ग्रामीण घरेलू ईंधन की आवश्यकता पूरी हो सकती है।
●बायोगैस से इथेनॉल और मेथेनॉल जैसे तरल ईंधन भी बनाए जाते हैं जिससे वाहन चलाए जाते हैं।
●बायोडीजल का रासायनिक नाम मिथाइल एस्टर्स है।
●बायोडीजल के स्रोत के रूप में रतनजोत (जेट्रोफा), करंज, पोंगोमियां एवं गन्ने से प्राप्त शोरे पर बल दिया जा रहा है।
●बायोगैस की उत्पादन संबंधित तकनीक का प्रशिक्षण देने के लिए भारत में तीन बायोगैस केंद्र कोयंबटूर, उदयपुर, पूसासमस्तीपुर में स्थित है।
●भारत में बायोगैस से ऊर्जा प्राप्त करने के संयंत्र दिल्ली के तिमारपुर में, पंजाब के झालखारी में, मुंबई तथा पोर्ट ब्लेयर में स्थापित किए गए हैं।
महासागरीय ऊर्जा या ज्वारीय ऊर्जा :-
●ज्वार, समुद्री जल तथा लहरे महासागरीय ऊर्जा के प्रमुख स्रोत हैं।
●ज्वार के उठने तथा गिरने से हाइड्रॉलिक टरबाइन से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जाती है।
●भारत में खंभात की खाड़ी(सर्वाधिक), कच्छ की खाड़ी, हुगली की एस्चुअरी, पश्चिमी तट पर गुजरात ,सुंदरवन क्षेत्र पश्चिम बंगाल में ज्वारी ऊर्जा के लिए उपयुक्त स्थल है। जिनका विभव 1000 मेगावाट है।
●समुद्र का जल महासागरीय तापीय ऊर्जा रूपांतरण(OTEC) का अक्षय ऊर्जा स्रोत है।
●OTEC में समुंद्र की ऊपरी सतह से 1000 मीटर की गहराई तक से ऊर्जा अवशोषित किया जाता है।
●अंडमान निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप OTEC ऊर्जा के लिए सबसे उपयुक्त क्षेत्र है।
●OTEC द्वारा ऊर्जा प्राप्त करने के लिए तमिलनाडु के कुलशेखरपट्टनम और लक्ष्यद्वीप में अमेरिका द्वारा प्रयास किया जा रहा है।
●समुद्र जल में पवन प्रवाह के कारण लहरें उत्पन्न होती हैं। इन लहरों से ऊर्जा प्राप्त करने के लिए चेंबर बनाकर दोलायमान जल स्तंभ से टरबाइन द्वारा विद्युत उत्पन्न किया जाता है।
●भारत का प्रथम समुद्री तरंग विद्युत संयंत्र विझिंगम में लगाया गया है। इसके अलावा निकोबार द्वीपसमूह के मूस प्वाइंट से भी समुद्री तरंग ऊर्जा प्राप्त होती है।
भूतापीय ऊर्जा :-
●पृथ्वी के आंतरिक भागों से ताप का प्रयोग कर उत्पन्न की जाने वाली विद्युत को भूतापीय ऊर्जा कहते हैं।
इसके तीन स्रोत हैं
1.अधोभौमिक गर्म जल
2.मिश्रित मण्डल का गर्म मैग्मा
3.गर्म चट्टाने
●हिमाचल प्रदेश मणिकरण, जम्मू कश्मीर पूगा घाटी, छत्तीसगढ़ में तातापानी आदि भूतापीय ऊर्जा संभावित क्षेत्र हैं।
●मणिकरण(हिमाचल प्रदेश),खम्मम(आंध्र प्रदेश) नामक स्थान पर भूतापीय संयंत्र लगाया गया है।
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