भारत का भूगोल भाग 14 । भारत मे सिंचाई एवं नहरे । sinchai aur naharen

भारत मे सिंचाई एवं नहरे । sinchai aur naharen


 भारत में सिंचाई परियोजनाओं को तीन भागों में विभाजित किया गया है।
1.वृहद सिंचाई परियोजना
2.मध्यम सिंचाई परियोजना 
3.लघु सिंचाई परियोजना

वृहद सिंचाई परियोजना :-
●वृहद सिंचाई परियोजना के अंतर्गत 10,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि योग्य भूमि आता है।
●इस वर्ग में नहरे एवं बहुउद्देशीय परियोजनाएं आती हैं।

 मध्यम सिंचाई परियोजना :-
●मध्यम सिंचाई परियोजना के अंतर्गत 2000 हेक्टेयर से अधिक किन्तु 10,000 हेक्टेयर से कम कृषि योग्य भूमि आती है। 
●देश में विकसित छोटी-छोटी नहरे इसी सिंचाई परियोजना का उदाहरण है।

लघु सिंचाई परियोजना :-
●लघु सिंचाई परियोजना के अंतर्गत 2000 हेक्टेयर से कम कृषि योग्य भूमि आती है।
●भारत की सिंचाई का लगभग 62% की आपूर्ति लघु सिंचाई परियोजना से की जाती है।
●कुएं, नलकूप, पंप सेट, ड्रिप सिंचाई, तालाब और छोटी-छोटी नहरे इसी सिंचाई परियोजना का उदाहरण है।

सिंचाई के प्रमुख साधन
●वर्तमान में देश में सिंचाई के प्रमुख साधन नलकूप हैं।
           साधन                सिंचित भाग/योगदान
          नलकूप                   45.06%
   नलकूप और कुआं           61.60%
          नहरों                       24.55%
         तलाब                        6.1%
       अन्य स्रोत।                   7.75%

●वर्तमान समय में भारत में 38% सिंचाई बड़ी एवं मध्यम परियोजनाओं के द्वारा होती है।
●तथा 62% सिंचाई लघु परियोजनाओं के द्वारा होती है।
●विश्व का सर्वाधिक सिंचित क्षेत्र चीन 21% और भारत 20.2% है।
●कृषि में जल उपयोग की दक्षता को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय लघु सिंचाई मिशन नामक योजना की शुरुआत 2010 में की गई थी।
●भारत में शुद्ध बोए गए क्षेत्र के लगभग 33% भाग पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है।
●वर्तमान समय में कुआं और नलकूप भारत में सिंचाई का प्रमुख साधन है।
●देश में सर्वाधिक सिंचित क्षेत्रफल वाले राज्य उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश है।
●और क्षेत्रफल के प्रतिशत की दृष्टि से सर्वाधिक सिंचित राज्य पंजाब 97.8% सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है।
●देश में सबसे कम सिंचित क्षेत्रफल प्रतिशत की दृष्टि से राज्य मिजोरम है यहां 7.3% क्षेत्रफल पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है।
●क्षेत्रफल की दृष्टि से सर्वाधिक असिंचित राज्य महाराष्ट्र,राजस्थान,मध्य प्रदेश,कर्नाटक,आंध्र प्रदेश है।
●देश में सर्वाधिक नलकूप व पंपसेट तमिलनाडु(18%)  और महाराष्ट्र (15.6%) दूसरा स्थान है।
●केवल नलकूपों की सर्वाधिक सघनता वाला राज्य उत्तर प्रदेश है।
●प्रायद्वीपीय भारत में सिंचाई का प्रमुख साधन तालाब है तालाब द्वारा सर्वाधिक सिंचाई तमिलनाडु राज्य में की जाती है।

● नहरों द्वारा सिंचित शीर्ष राज्य क्रमशः उत्तर प्रदेश,   आंध्र प्रदेश, राजस्थान, पंजाब,कर्नाटक।
●नलकूप द्वारा सिंचित शीर्ष राज्य क्रमशः उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, बिहार, आंध्र प्रदेश।
●वाटर टैंक द्वारा सिंचित शीर्ष राज्य आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश।

●भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में सर्वाधिक सिंचाई नलकूपों द्वारा होता है।

उत्तर प्रदेश राज्य में सिंचाई के साधन
नलकूप (सर्वाधिक)                    71.9%
नहर                                         20.5%
तालाब, झील, कुआं, पोखरा          6.6%
 अन्य साधन                               0.6%


● सरयू पार मैदान में नहरों का अभाव पाए जाने के कारण नलकूपों द्वारा बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में सिंचाई का कार्य किया गया।

●अटल बिहारी बाजपेई के द्वारा जल संग्रहण से संबंधित विकास या बंजर भूमि के विकास के लिए हरियाली योजना का शुभारंभ 2003 में किया गया।

●ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधीन इस योजना के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

●भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा  तीन वाटरशेड विकास कार्यक्रम का शुरुआत 2008 में किया गया।
1.समेकित बंजर भूमि विकास कार्यक्रम (IWDP)
2.सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम(DPAP) 
3.मरुभूमि विकास कार्यक्रम(DDP)

● यह तीनों प्रोग्राम भूमि संसाधन विभाग (डेवलपमेंट ऑफ लैंड  रिसोर्सेज द्वारा चलाए जाते हैं।

●1 अप्रैल 2008 के बाद से इन कार्यक्रमों को एक व्यापक कार्यक्रम के अंतर्गत लाया गया जिसे समेकित जलसंभर प्रबंधन कार्यक्रम( integrated  watershed management programme) के नाम से जाना जाता है।(IWMP)

●इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मृदा, जल, वनस्पति जैसे अवक्रमिक प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल, संरक्षण और विकास करके पारिस्थितिकी संतुलन को बहाल करना है।

●इसके परिणाम स्वरूप मृदा ह्रास पर रोक लगती है। प्राकृतिक वनस्पति का पुनः सृजन होता है और वर्षा जल का एकत्रीकरण होता है तथा भू-जल के स्तर में सुधार आता है।
● भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण वविकास मंत्रालय का एक विभाग है।
●वर्षापूरित क्षेत्रों हेतु राष्ट्रीय जलसंभर विकास परियोजना(NWDPRA) कृषि एवं सहकारिता विभाग (कृषि मंत्रालय) का कार्यक्रम है।
● जीवन रक्षक अथवा बचाव सिंचाई PWP (permanent wilting point) सिंचाई को इंगित करता है।
●PWP जमीन के अंदर पानी की उस मात्रा को इंगित करता है जिसे पौधे अपने उपयोग के लिए प्राप्त नहीं कर पाते है। इस अवस्था में पौधे मुरझाने लगते हैं ऐसी स्थिति में सिंचाई अति आवश्यक हो जाती है।

सूक्ष्म सिंचाई पद्धति 
● सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली में कम पानी से अधिक क्षेत्र की सिंचाई की जाती है।इस प्रणाली में पानी को पाइप लाइन के माध्यम से स्रोत से खेत तक पहुँचाया जाता है।
● सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली सामान्य रूप से बागवानी फसलों में उर्वरक और पानी देने की सर्वोत्तम एवं आधुनिक विधि मानी जाती है।

● सूक्ष्म सिंचाई पद्धति में मृदा से उर्वरक (पोषक)हानि कम की जा सकती है। और भूमि के जल स्तर को कम होने से रोका जा सकता है।
● इस प्रणाली से सिंचाई करने पर फसलों की गुणवत्ता और उत्पादकता में भी सुधार आता है।
● सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली की प्रमुख दो विधियां हैं :-
1. फव्वारा विधि (sprinkler method)
2. टपक विधि(drop method)

● फव्वारा विधि के द्वारा पानी का हवा में छिड़काव किया जाता है जो कृत्रिम वर्षा का एक रूप है।
● फव्वारा विधि में पानी महीन बूंदों में बदलकर वर्षा की फुहार की तरह पौधों के ऊपर गिरता है।
● पानी की कमी वाले क्षेत्रों में फव्वारा विधि बेहद लाभदायक साबित हुई है।
● टपक विधि के द्वारा पौधों की जड़ो के आसपास वाली सतह या उप सतह पर ड्रीपर्स के माध्यम से आवश्यकतानुसार पानी दिया जाता है।
● टपक प्रणाली में बूद बूद द्वारा फसलों और बागवानी पौधों की सिंचाई की जाती है।
● टपक प्रणाली से सिंचाई करने से लगभग 50 फ़ीसदी पानी की बचत होती है।
● टपक विधि का विकास 1960 के दशक के आरंभ में इजरायल तथा 1960 के दशक के अंत में ऑस्ट्रेलिया उत्तरी अमेरिका में हुआ।

फर्टिगेशन विधि 
फर्टिगेशन दो शब्दो फर्टिलाइजर(उर्वरक) और इरीगेशन(सिंचाई) से मिलकर बना है। इस नई विधि में टपक विधि से सिंचाई करते समय पानी के साथ-साथ उर्वरकों को भी पौधों तक पहुचाया जाता है।

●फर्टिगेशन को खेतो में उर्वरक डालने की सर्वोच्चम तथा अत्याधुनिक विधि मानी जाती है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
2015 में शुरु इस योजना का प्रमुख उद्देश्य हर खेत को पानी की तहत कृषि क्षेत्र का विकास करना खेतों में पानी इस्तेमाल करने की दक्षता को बढ़ाकर पानी की बर्बादी को रोकना है। सही सिंचाई और पानी को बचाने की तकनीक को अपनाना तथा हर बूंद अधिक फसल आदि शामिल है।

नहरें :- नहरे मानव निर्मित संरचना है इसका मुख्य उपयोग खेती में सिंचाई के लिए तथा जल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुचाने में किया जाता है।

देश की प्रमुख नहरें

1. उत्तर प्रदेश की प्रमुख नहरे 

●पूर्वी यमुना नहर यमुना नदी पर
●आगरा नहर यमुना नदी पर
●निचली गंगा नहर गंगा नदी पर(नरौरा, बुलंदशहर)
●शारदा नहर शारदा नदी पर
●बेतवा नहर बेतवा नदी पर(झाँसी, परिच्छा स्थान)

●ऊपरी गंगा नहर गंगा नदी पर(हरिद्वार) उत्तराखंड

2.बिहार की प्रमुख नहरे

●पूर्वी सोन नहर सोन नदी पर
●पश्चिमी सोन नहर सोन नदी पर
●त्रिवेणी नहर गण्डक नदी पर
●गण्डक बांध योजना दो नहर पर (त्रिवेणी व सारण)

3.पंजाब की प्रमुख नहरे

●सरहिंद नहर सतलज नदी पर
●ऊपरी बारी दोआब नहर रावी नदी पर
●नांगल बांध नहर सतलज नदी पर
●बिस्त दोआब नहर सतलज नदी पर
●भाखड़ा नहर सतलज नदी पर
●पूर्वी नहर रावी नदी पर

4.हरियाणा की प्रमुख नहरे

 ●पश्चिमी यमुना नहर यमुना नदी पर
 ●गुड़गांव नहर यमुना नदी पर

5.पश्चिम बंगाल की प्रमुख नहरें

●मिदनापुर नहर कोसी नदी पर
●एडन नहर दामोदर नदी पर
●तिलकपाड़ा बांध की नहरे  मयूराक्षी नदी पर
●दामोदर नदी की नहरे  दामोदर नदी पर (दुर्गापुर)

6. राजस्थान की प्रमुख नहरें
 
●इंदिरा नहर सतलज एवं व्यास नदियों के संगम पर
                                           स्थित हरीक़े बैराज
●घग्गर परियोजना जग्गर नदी पर
●मोरेल परियोजना मेजा नदी पर
●गूढ़ा परियोजना मेजा नदी पर
●पार्वती परियोजना पार्वती नदी पर
●बांकली परियोजना सूकर नदी पर
●गम्भीरी परियोजना गम्भीर नदी पर (चितौड़गढ़)
●कालीसिल परियोजना कालीसिन नदी पर
●राजस्थान इंदिरा नहर निकालती है सतलज नदी से।
●इंदिरा गांधी नहर सतलज, ब्यास,रावी नदी से जल प्राप्त करती है।
● इंदिरा गांधी नहर व्यास नदी के पोंग बांध के जल का उपयोग करती है। 
●व्यास परियोजना पंजाब, हरियाणा और राजस्थान राज्यों की सम्मिलित परियोजना है।

7.महाराष्ट्र की प्रमुख नहरें

●वीर परियोजना नीरा नदी पर
●मूला परियोजना मूला नदी पर
●भण्डारदरा बांध की नहरे प्रावीरा नदी (प.घाटी                                               पर्वत)
●मूठा नहर फाइफ झील पर ( खडकवासला)
●गोदावनी नहर गोदावरी नदी पर(बेल झील के                                                           सपीम)

8.तमिलनाडु की नहरे

●कावेरी डेल्टा नहर कोलेरून नदी पर (कावेरी नदी                                                         की शाखा)                                                 
●पेरियार परियोजना पेरियार नदी पर
●मैटूर परियोजना कावेरी नदी पर
●निचली भवानी नहर भवानी नदी(कावेरी की                                                            सहायक नदी)

9.केरल की प्रमुख नहरे

●मंगलम योजना की नहरे मालाबार जिला
●वलायर यलाशल की नहरे वलायर नदी(पेरियार की                                                      सहायक नदी)
●मलमपुझा बांध की नहरे मलमपुझा नदी(मालाबार                                                                जिला)
●चिराकुझी सिंचाई परियोजना
●गायत्री(मीनकरा,चूलियार)सिंचाई परियोजना
●पोथुंडी सिंचाई परियोजना
                                                           
10.आन्ध्र प्रदेश की प्रमुख नहरे

●तुंगभद्रा परियोजना तुंगभद्रा नदी (कृष्णा की                                                            सहायक नदी)
●कृष्णा-पेन्नार परियोजना कृष्णा तथा पेन्नार नदी पर
●रामपद सागर परियोजना गोदावरी नदी(पोलावरम                                                          नामक स्थान)
●कृष्णा सिंचाई योजना की नहरे कृष्णा नदी पर
●कृष्णा डेल्टा की नहरे कृष्णा नदी पर
●गोदावरी डेल्टा की नहरे गोमती,गोदावरी नदी पर
●निजामसागर परियोजना मांजीरा नदी पर 
 
 महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

● माला नहर तंत्र को कैप्टन दिनशा जे. दस्तूर ने प्रस्तावित किया था।
● नदी जोड़ने का पहली बार विचार सिंचाई इंजीनियर विश्वेश्वरैया ने दिया था। बाद में के. एल. राव का नाम भी इससे जुड़ गया।
● विश्व की सबसे पुरानी एवं विकसित नहर व्यवस्था गंग नहर है। 
●इसका निर्माण 1927 में बीकानेर के महाराजा श्री गंग सिंह ने कराया था।
●यह नहर सतलज नदी से फिरोजपुर के निकट हुसैनीवाला से निकाली गई है।
●इंदिरा गांधी नहर परियोजना का शिलान्यास 30 मार्च 1958 को तत्कालीन गृह मंत्री गोविंद बल्लभ पंत ने किया था।
●इसका उद्गम पंजाब में सतलुज और व्यास नदियों के संगम पर स्थित हरिके बैराज बांध है।
●यह विश्व की सबसे बड़ी नहर परियोजना है इसकी लंबाई 649 किलोमीटर है।
● उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादकता एवं उत्पादन में वृद्धि करके कृषि क्षेत्र का विकास करने के उद्देश्य से तीन परियोजनायो का सृजन किया गया।
1.शारदा सहायक परियोजना
2.रामगंगा परियोजना
3.गंडक परियोजना
●शारदा सहायक समादेश विकास परियोजना के मुख्य लक्ष्य हैं।
1.भू-प्रबंधन का सुधार
2.कृषि उत्पादन बढ़ाना
3.बहु-फसली खेती द्वारा भूमि उपयोग के प्रारूप को बदलना।
● फरक्का बैराज का निर्माण 1975 में हुगली नदी में सिल्ट के जमाव को रोकने के उद्देश्य से किया गया था।
●फरक्का नदी की जलवहन क्षमता 40,000 क्यूसेक है।












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