भारत का भूगोल भाग :- 10 भारत की जलवायु । मानसून । वर्षा । शीतकालीन वर्षा । bharat ki jalavayu । mansun । varsha । shitakalin varsha
भारत की जलवायु । मानसून । वर्षा । शीतकालीन वर्षा । bharat ki jalavayu । mansun । varsha । shitakalin varsha
मानसून
●मानसून शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के 'मौसिम' शब्द से हुआ है जिसका तात्पर्य मौसम से है।
●मानसून का अर्थ एक वर्ष के दौरान वायु की दिशा में ऋतु के अनुसार परिवर्तन से है।
● भारत की प्रायद्वीपीय आकृति के कारण दक्षिण पश्चिम का मानसून दो शाखाओं में विभाजित हो जाता है:-
1. अरब सागर की शाखा( दक्षिण-पश्चिम मानसून)
2. बंगाल की खाड़ी की शाखा(उत्तर-पूर्व मानसून)
● अरब सागर शाखा का मानसून सबसे पहले भारत के केरल राज्य में जून के प्रथम सप्ताह में आता है।यह मानसून पश्चिमी घाट पर्वत से टकरा कर केरल के तटों पर वर्षा करता है।
●अरब सागर शाखा का मानसून गारो,खासी,जयंतिया की पहाड़ियों पर बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाओ द्वारा अधिक वर्षा लाती है। जिसके कारण
●विश्व में सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान वर्तमान में मासिनराम(मेघालय) (लगभग 1141 cm)है।●इसके पहले चेरापूंजी(मेघालय) था।
●भारत में सर्वाधिक वर्षा दक्षिण पश्चिम मानसून द्वारा पश्चिमी घाट,पूर्वी हिमालय तथा मेघालय में होता है।
●मासिनराम और चेरापूंजी में सबसे अधिक वर्षा का कारण पहाड़ियों की कीप की तरह आकृति का होना है।
●भारत के केरल राज्य में मानसून का आगमन सबसे पहले होता है।
●भारत में कुल वर्षा का लगभग 80% वर्षा दक्षिण पश्चिम मानसून (सक्रियता जून से सितंबर तक) से प्राप्त होती है।
●दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रारंभ भारत के केरल राज्य से शुरू हो जाता है।
●भारत में ग्रीष्मकालीन मानसून के प्रवाह की सामान्य दिशा दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व की ओर होती है।
●जबकि शीतकाल में मानसून की दिशा उत्तर पूर्व से दक्षिण पश्चिम की ओर हो जाती है।
●अक्टूबर से दिसंबर माह के मध्य, दक्षिण भारत में उत्तर पूर्व मानसून का मौसम रहता है जो मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश तमिलनाडु में सक्रिय रहता है।
●उत्तरी पूर्वी मानसून (लौटती हुई मानसून) से जाड़ो के दिनों में सबसे अधिक वर्षा तमिलनाडु(चेन्नई)या कोरोमंडल तट पर होती है।
● तमिलनाडु पश्चिमी घाट के पर्वत वृष्टि छाया क्षेत्र में पड़ता है इसलिए यहां दक्षिण पश्चिम मानसून द्वारा काफी कम वर्षा होता है।
● शरद ऋतु को मानसून प्रत्यावर्तन का काल कहा जाता है।
● इस ऋतु में बंगाल की खाड़ी एवं अरब सागर में उष्णकटिबंधीय चक्रवातओं की उत्पत्ति होती है।
● इन चक्रवातो से पूर्वी तटीय क्षेत्रों में मुख्यतः आंध्र प्रदेश, उड़ीसा तथा पश्चिमी तटीय क्षेत्र में गुजरात में काफी क्षति पहुंचती है।
● तमिलनाडु में भी प्रत्यावर्ती मानसून का प्रभाव होता है
●भारतीय मानसून की दिशा 6 माह तक
जाड़े में उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर तथा
शेष 6 माह तक
ग्रीष्म में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर रहती है।
●भारत में सबसे कम वर्षा लेह (9.20 cm) में होती है।
● भारत में वर्षा की सबसे अधिक विरलता पाई जाती है लेह में।
● भारत में सबसे कम वर्षा कच्छ से पंजाब व हरियाणा तक होती है।
● पश्चिमी तट के भागो एवं उत्तर-पूर्वी भारत में लगभग 400 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा होती है। किंतु पश्चिमी राजस्थान इससे सटे पंजाब,हरियाणा, गुजरात के भागों में 60 सेंटीमीटर से भी कम वर्षा होती है।
मानसूनी हवाओ की उत्पत्ति:-
1.नवीन संकल्पना के अनुसार मानसूनी हवाओं की उत्पत्ति वायुदाब और हवाओं की पेटियों के खिसकाव के कारण होता है इस संकल्पना का प्रतिपादन पहली बार फ्लोन नामक विद्वान ने किया था।
2.तापीय संकल्पना के अनुसार मानसून की उत्पत्ति स्थल एवं जल के असमान संगठन तथा उनके गर्म और ठंडा होने के विरोधी स्वभाव के कारण होता है।
इस पर सूर्य के उत्तरायण और दक्षिणायन होने का पर्याप्त प्रभाव पड़ता है।
जलवायु
●किसी क्षेत्र में लंबे समय तक मौसम की जो स्थिति होती है उसे उस स्थान की जलवायु कहते हैं।
●भारत की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु है।
मौसम
●किसी क्षेत्र में थोड़े समय की वायुमंडलीय अवस्था को उस क्षेत्र का मौसम कहते हैं।
●भारत में मौसम संबंधित सेवा 1875 ई0 में आरंभ की गई थी इसका मुख्यालय शिमला था।
●प्रथम विश्व युद्ध के बाद इसका मुख्यालय पुणे हो गया ।
●अब वर्तमान में भारत के मौसम संबंधित मानचित्र पुणे से प्रकाशित होते हैं।
वर्षा का दिन
●भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की परिभाषा के अनुसार 24 घंटे में 2.5 मिमी.या उससे ऊपर की वर्षा वाले स्थान को वर्षा का दिन कहा जाता है।
● भारत में औसतन वर्षा 118 सेंटीमीटर होती है।
भारतीय जलवायु को मानसून के अलावा प्रभावित करने वाले कारक
●उत्तर में हिमालय पर्वत और
●दक्षिण में हिंद महासागर
ऋतु
भारत में निम्न चार ऋतु चक्रवत पाई जाती है :-
●शीत ऋतु (15 दिसंबर से 15 मार्च तक)
●ग्रीष्म ऋतु (16 मार्च से 15 जून तक )
●वर्षा ऋतु (16 जून से 15 सितंबर तक )
●शरद ऋतु (16 सितबंर से 14 दिसंबर तक )
मानसून के अनुसार वार्षिक वर्षा का वितरण
वर्षा का मौसम वर्षा अवधि
● दक्षिण पश्चिम मानसून 73.70% june-sept
● परवर्ती मानसून 13.30% Oct- Dec
(उत्तरी-पूर्वी मानसून)
● पूर्व मानसून 10.0% March-may
● शीत ऋतु 2.6% jan-feb
(उत्तरी पश्चिमी मानसून)
●उत्तर भारत के मैदानी भागों में शीत ऋतु में वर्षा पश्चिमी विक्षोभ या जेट स्ट्रीम के कारण होती है।
● ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली गर्म एवं शुष्क हवाओं को उत्तर-पश्चिम भारत के शुष्क भागों में लू(loo) कहते है।
●ग्रीष्म ऋतु में असम एवं पश्चिम बंगाल राज्यों में चलने वाली तीव्र आर्द्र हवाओं को पूर्वी भारत में नॉर्वेस्टर, पश्चिम बंगाल में काल बैसाखी, कर्नाटक में चेरी ब्लॉस्म एवं काफी वर्षा कहा जाता है जो काफी की कृषि के लिए लाभदायक होता है। इन हवाओं को दक्षिण भारत(केरल) में आम्र वर्षा कहते हैं क्योंकि ये आर्द्र हवाऐ आम की फसल के लिए लाभदायक होती है।
● दक्षिण पश्चिम मानसून द्वारा लाए कुल आर्द्रता का 65% भाग अरब सागर से तथा 35% भाग बंगाल की खाड़ी से आता है।
● दक्षिणी पश्चिमी मानसून के कारण भारतीय उपमहाद्वीप पर ग्रीष्म ऋतु में उच्च तापमान एवं निम्न दाब व हिंद महासागर में वायु का कर्षण होता है।
● मानसून नवर्तन में सबसे अधिक वर्षा दिल्ली में होती है।
● अरब सागरीय मानसून की एक शाखा सिंध नदी के डेल्टा क्षेत्र से आगे बढ़कर राजस्थान के मरुस्थल से होती हुई सीधे हिमालय पर्वत से टकराती है वहां धर्मशाला के निकट अधिक वर्षा करती है।
●राजस्थान में अरावली पर्वतमाला मानसून की शाखा के समानांतर पड़ता है इससे मार्ग में अवरोध ना होने के कारण राजस्थान में वर्षा का अभाव पाया जाता है।

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