भारत का भूगोल भाग :-2(B) दक्षिण एवं मध्य भारत की पर्वत श्रेणियां व पहाड़ियां। प्रायद्वीपीय पठार।bharat ka bhool bhag 2(B) dakshin aur madhy bharat ke parvat prayadvipiy pathar


भारत का भूगोल भाग :-2(B) दक्षिण एवं मध्य भारत की पर्वत श्रेणियां व पहाड़ियां। प्रायद्वीपीय पठार।bharat ka bhool bhag 2(B) dakshin aur madhy bharat ke parvat prayadvipiy pathar 

 प्रायद्वीप :-  प्रायद्वीप भूमि के वे भाग होते हैं जिनके तीन तरफ जल तथा एक ओर स्थल होता है।

प्रायद्वीपीय पठार :- 


● यह भारत का सबसे प्राचीन भाग है
● प्रायद्वीपीय पठार गोंडवानालैंड का भाग है
● प्रायद्वीपीय पठार का आकार लगभग त्रिभुजाकार है
● प्रायद्वीप प्राचीन नाइस व ग्रेनाइट से बना है 
●इसका निर्माण प्रीकैंब्रियन काल में  आर्कियन चट्टानों से हुआ है।
● उत्तर में दिल्ली, कटक (अरावली विस्तार),कैमूर, राजमहल पहाड़िया पूर्व में पूर्वी घाट, पश्चिम में पश्चिमी घाट और दक्षिण में इलायची (कार्डामम पहाड़ियां) प्रायद्वीपीय  पठार की सीमाएं  निर्धारित करती हैं।

● उत्तर पूर्व में शिलांग तथा कार्बी एंगलांग पठार भी इसी भूखंड का विस्तार है।

● प्रायद्वीपीय भारत अनेक पठारो से मिलकर बना है
 जैसे:-  हजारीबाग पठार, पालायु पठार, रांची पठार, मालवा पठार, कोयंबटूर पठार, कर्नाटक पठार आदि।

● सामान्य तौर पर प्रायद्वीप की ऊंचाई पश्चिम से पूर्व की ओर कम होती चली जाती हैं।

●प्रायद्वीपीय पठार को पांच भागों में बांटा जा सकता है 

1. मध्य उच्च भू -भाग
2. उत्तर पूर्वी पठार
3. दक्कन का पठार
4. पूर्वी पठार
5. दक्षिण भारत के पर्वतीय क्षेत्र

1. मध्य उच्च भू-भाग :-


(i)  अरावली पर्वत श्रृंखला(राजस्थान)
(ii) मेवाड़ का पठार(राजस्थान)
(iii) मालवा पठार(राजस्थान व मध्यप्रदेश)
(iv) बुंदेलखंड पठार
(v) विंध्याचल पर्वत
(vi) सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला

(i) अरावली पर्वत श्रृंखला :-


●  अरावली श्रेणी गुजरात के पालनपुर से लेकर राजस्थान एवं हरियाणा से होकर दिल्ली तक लगभग 800 किलोमीटर की लंबाई में फैली है।

● अरावली पर्वत का सबसे ज्यादा विस्तार राजस्थान राज्य में पाया जाता है।
● इसका निर्माण प्रीकैंब्रियन काल में हुआ था।
●जो 600 से 570 मिलियन वर्ष पूर्व का माना जाता है।
●यह भारत की ही नहीं बल्कि विश्व की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला में से एक है।

● इसकी सर्वोच्च चोटी गुरु शिखर (1722 मीटर) है जो की माउन्ट आबू की पहाड़ी पर स्थिति है

● माउंट आबू की पहाड़ी पर दिलवाड़ा का जैन मंदिर स्थित (राजस्थान)है।

● अरावली पर्वत को अपशिष्ट पर्वत (घर्षित पर्वत)भी कहा जाता है।

● अपशिष्ट पर्वत या घर्षित पर्वत या मोडदार पर्वत के उदाहरण है :-विंध्याचल, अरावली, सतपुड़ा आदि है।

● अरावली की पहाड़ियों के पश्चिम से माही और लूनी नदी निकलती हैं और पूर्व की ओर से बनास नदी निकलती है।

● लूनी नदी राजस्थान के सांभर लेक झील से निकलती है और कच्छ के रण में जाकर विलुप्त हो जाती है
● लूनी नदी अंतः प्रवाह नदी का उदाहरण है 

●अरावली पर्वत श्रृंखला से जवाई एवं सुलेरी नदी निकलती है और लूनी नदी में जाकर मिल जाती है।

● अरावली पर्वत श्रृंखला से ग्रेनाइट एवं नीस की चट्टाने पाई जाती हैं जोकि अधात्विक खनिज (जिप्सम बलुआ पत्थर, संगमरमर आदि) का उदाहरण है।

● भवन निर्माण में अधात्विक खनिज का प्रयोग किया जाता है।

● अरावली पर्वत को दिल्ली में रायसीना पहाड़ी के नाम से जाना जाता है इसी रायसीना पहाड़ी पर राष्ट्रपति भवन स्थित है।

(iii) मालवा पठार :-


●मालवा पठार  बेसाल्ट चट्टानो से बना हुआ है।
● बेसाल्ट चट्टान से काली मृदा का निर्माण होता है
● मालवा पठार की महत्वपूर्ण नदियां चंबल, बेतवा, पार्वती, बनास, कालीसिंध है।
● मालवा का पठार,राजस्थान, मध्य प्रदेश राज्य में है यह ज्वालामुखी चट्टानों का बना हुआ है ।
● चंबल नदी द्वारा मालवा पठार में अधिक मात्रा में अपरदन (कटाव) किया गया इस कटाव के कारण उत्पात( बीहड़) या गहरे - गहरे गड्ढे का निर्माण हो गया।
● ऐसा अपरदन जिसके द्वारा गहरी गहरी घाटियों का निर्माण हो जाता है उसको अवनलिका अपरदन(rill erosion) कहा जाता है।
● चंबल नदी का उद्गम स्थल मालवा पठार के 
जानापाव पहाड़ी से है
● चंबल नदी पर बने बांध :- 3 बांध बने है।
(i)गाँधी सागर बांध(मध्यप्रदेश, मंदसौर)
(ii)जवाहर सागर बांध(राजस्थान, रावतभाटा)
(iii)राणा सागर बांध(राजस्थान, कोटा)

(iv) बुंदेलखंड पठार :- 


● बुंदेलखंड पठार का विस्तार मध्य प्रदेश के 6 जिलो मेंं  तथा  उत्तर प्रदेश के 7 जिलों में है ।
 ●बुंदेलखंड को 2 मंडलोंझांसी मंडल तथा चित्रकूट मंडल में विभाजित किया गया है।
●झांसी मंडल :- जिले-झांसी,ललितपुर, जालौन
●चित्रकूट मंडल:- जिले- चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर,बाँदा
● बुंदेलखंड पठार ग्रेनाइट एवं नीस चट्टानों से बना हुआ है।
● बुंदेलखंड पठार पर लाल मृदा की अधिकता है इस मृदा में मोटे अनाज एवं तिलहन की  खेती की जाती है।
● बुंदेलखंड पठार की दो महत्वपूर्ण नदियां केन और बेतवा है बेतवा नदी पर एक महत्वपूर्ण बाद माताटीला बांध(रानी लक्ष्मी बाई बांध जिला झांसी) बना है।
● बुंदेलखंड पठार की सबसे ऊंची चोटी सिद्ध बाबा की चोटी(1172 मीटर) है।
●इस पठार के कुछ महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल दतिया में सोनागिरी,रतनगण मंदिर,छतरपुर में खजुराहो का मंदिर,पयोराजी जैन तीर्थ स्थक,बलदेवगर का किला,
टीकमगढ़,ओरक्षा,अश्रू माता मंदिर,कुंडेश्वर,उर्मिला परियोजना आदि स्थित है।

(v) विंध्याचल पठार :-

विंध्याचल पर्वत  मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश  के मध्य सीमा निर्धारण करता है।
●  इसका विस्तार गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार तक है।
●इसका उच्चतम बिंदु अमरकंटक है।
● विंध्याचल पर्वत के समीप  विंध्यन क्रम की चट्टाने पाई जाती हैं। इन चट्टानों में अधात्विक खनिजओं की अधिकता है।
●ऐसे खनिज जिसमें धातुओं का अंश नहीं पाया जाता अधात्विक खनिज कहलाते हैं।
● अधात्विक खनिज के उदाहरण हैं :-  अभ्रक,चूना पत्थर, बालू पत्थर, संगमरमर, जिप्सम,सेलखड़ी आदि।

(vi) सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला :-

● सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला का विस्तार गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तक है।
● यह पर्वत श्रेणी एक ब्लॉक पर्वत है जो मुख्यतः ग्रेनाइट एवं बेसाल्ट चट्टानों से निर्मित है।
●इस पर्वत श्रेणी की सर्वोत्तम चोटी धूपगढ़(1350 मी0) है जो महादेव पर्वत(मध्यप्रदेश ) पर स्थित है।
●मैकाल पर्वत में स्थित अमरकंटक पठार से नर्मदा तथा सोन नदीयो का उद्गम होता है।
●सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला को गुजरात मे राजपीपला मध्यप्रदेश में महादेव पहाड़ी तथा छत्तीसगढ़ में मैकाल पर्वत के नाम से जाना जाता है।
●महादेव पहाड़ी(मध्यप्रदेश) पर स्थित पचमढ़ी एक प्रमुख पर्यटन स्थल तथा जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र भी है ।

पूर्वी पठार :-  पूर्वी पठार को पांच भागों में बांटा गया है जो निम्न है :-


1. छोटा नागपुर का पठार
2. दंडकारण्य पठार
3. मेघालय पठार
4. बघेलखंड का पठार
5. छत्तीसगढ़ बेसिन

1. छोटा नागपुर का पठार :-

●इसका विस्तार झारखंड(अधिकतर विस्तार), प.बंगाल, बिहार व छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों तक है।
●इस पठार से तीन नदियां प्रवाहित होती है :-
दामोदर नदी,सुबर्णरेखा नदी,बराकर नदी ।
● इस पठार का सबसे उच्चतम बिन्दु पारसनाथ (1350 मीटर ) है।
● इसे भारत का रूर भी कहा जाता है  क्योंकि यहां संसाधनों की प्रचुरता है।
● भारत में खनिज संसाधनों का सबसे महत्वपूर्ण संकेंद्रण छोटा नागपुर पठार है इसलिए इसे भारत का खनिज हृदय कहा जाता है।

●इसके अंतर्गत तीन पठार आते हैं :-
(i)  रांची पठार
(ii) हजारीबाग पठार
(iii) राजमहल पहाड़ी

 ●रांची के पठार एवं हजारीबाग पठार के बीच से दामोदर नदी प्रवाहित होती है।
● दामोदर नदी भ्रंश घाटी में प्रवाहित होती है।
● इसके अलावा नर्मदा और ताप्ती नदियां भी भ्रंश घाटी में  प्रवाहित होती हैं।
● भारत की रूर नदी दामोदर नदी को कहा जाता है दामोदर नदी घाटी में भारत का सर्वाधिक कोयला पाया जाता है।
● भारत की कोयला राजधानी धनबाद को कहा जाता है।
● दामोदर नदी घाटी पर भारत की सबसे पहली जल विद्युत परियोजना दामोदर वैली कारपोरेशन प्रारंभ की गई थी।

(iii) राजमहल पहाड़ी :-

● राजमहल पहाड़िया झारखंड में छोटा नागपुर पठार के उत्तर पूर्व भाग में स्थित हैं।
● यह पहाड़ी बेसाल्ट चट्टान से निर्मित है।
● इसका निर्माण जुरासिक युग में होने वाले ज्वालामुखी उद्गार के फल स्वरुप हुआ।
● यह पहाड़ियां लावा द्वारा निर्मित है।
● कोडरमा शहर से अभ्रक की प्राप्ति होती है यह शहर राजमहल पहाड़ी के पास स्थित है।
● भारत का पहला लौह इस्पात कारखाना झारखंड के जमशेदपुर में स्थापित है।
● स्टील नगरी के नाम से प्रसिद्ध है बोकारो

2. दंडकारण्य पठार :-


● दंडकारण्य पठार का विस्तार महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, उड़ीसा तक माना जाता है।
● इसके पश्चिम में अबूझमार हिल्स तथा पूर्व में पूर्वी घाट शामिल है।
● दंडकारण्य भारत का एक पौराणिक क्षेत्र है जिसका उल्लेख रामायण में मिलता है।
● दंडकारण्य पठार से एक महत्वपूर्ण नदी इंद्रावती निकलती है।
● इंद्रावती नदी पर चित्रकूट जलप्रपात(छत्तीसगढ़) स्थित है।
● चित्रकूट जलप्रपात को भारत का नियाग्रा जलप्रपात कहा जाता है।
● दंडकारण्य पठार के दक्षिण में बस्तर पठार(छत्तीसगढ़)स्थित है जहां से टिन की प्राप्ति होती है।












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