भारत का भूगोल भाग :- 15 कृषि । कृषि के प्रकार । निर्वाह कृषि । वाणिज्यिक कृषि। स्थानांतरित कृषि । रबी की फसलें।खरीफ की फसलें।जायद की फसलें। krishi । krishi ke prakar । sthanantarit krishi । nirvah krishi । vanijyik krishi।rabi ki fasal।kharif ki fasal । jayad ki fasal
कृषि । कृषि के प्रकार । निर्वाह कृषि । वाणिज्यिक कृषि। स्थानांतरित कृषि । रबी की फसलें।खरीफ की फसलें।जायद की फसलें
कृषि (एग्रीकल्चर) :-
एग्रीकल्चर शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्दो एगर या एग्री
से हुआ। जिसका अर्थ मृदा और कल्चर अर्थात कृषि या जुताई करने से है।
●जिस भूमि पर फसलें उगाई जाती है कृषिगत भूमि कहलाती है।
●विश्व में पचास प्रतिशत लोग कृषि से सम्बंधित क्रियाओं में संलग्न है।
●भारत की दो-तिहाई जनसंख्या कृषि पर निर्भर है।
●भारत मे कृषि को जीविकोपार्जन का साधन समझा जाता है।
●बोरलॉग पुरस्कार कृषि विज्ञान के क्षेत्र में दिया जाता है। इस पुरस्कार की शुरुआत 1972 में नोबेल पुरस्कार विजेता नार्मन ई. बोरलॉग के नाम पर किया गया था।
कृषि के प्रकार :- दो मुख्य प्रकार है।
1. निर्वाह कृषि
2. वाणिज्यिक कृषि
निर्वाह कृषि :-
●इस प्रकार की खेती, कृषक परिवारों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए की जाती है।
●इस प्रकार की खेती से केवल अपने परिवार का पेट भरा जा सकता है।
●इस तरह की कृषि जमीन के छोटे टुकड़ों पर की जाती है।
●निर्वाह कृषि को दो भागों में बांटा जा सकता है :-
1. गहन निर्वाह कृषि
2. आदिम निर्वाह कृषि
गहन निर्वाह कृषि :-
●गहन निर्वाह कृषि में किसान एक छोटे भूखंड पर साधारण औजारों और अधिक श्रम से खेती करता है। ●गहन निर्वाह कृषि दक्षिण, दक्षिण-पूर्व और पूर्वी एशिया के सघन जनसंख्या वाले मानसूनी प्रदेशों में प्रचलित है।
●मुख्य फसल चावल है। इसके अलावा दलहन,तिलहन,मक्का, गेहूं आदि शामिल है।
आदिम निर्वाह कृषि या कर्तन दहन कृषि या स्थानांतरित कृषि :-
●आदिम निर्वाह कृषि में स्थानांतरित कृषि प्रचलित है।और चलवासी पशुचारण शामिल है।
●इसे कर्तन दहन कृषि के नाम से भी जाना जाता है।
●इस कृषि में भूमि की उर्वरता समाप्त होने के बाद भूमि छोड़ दी जाती है और किसान नए भूखंड पर चला जाता है।
●वृक्षों को काटकर जलाकर भूखंड को साफ किया जाता है। और राख को मृदा में मिलाया जाता है।
●आलू, मक्का, कसावा प्रमुख फसलें हैं।
●यह कृषि अमेजन बेसिन के सघन वन क्षेत्र,उष्ण कटिबंधीय अफ्रीका, दक्षिण-पूर्वी एशिया, उत्तरी-पूर्वी भारत के भागों में प्रचलित है।
●स्थानांतरित कृषि या चलवासी कृषि असम और बिहार की मुख्य समस्या है।
●स्थानांतरित कृषि को विश्व के विभिन्न भागों में विभिन्न नामों से जाना जाता है।
झुमिंग या झूम - उत्तरी-पूर्वी भारत ( जैसे असम,मेघालय,नागालैंड,मिजोरम)
पामलू - मणिपुर
दीपा - छत्तीसगढ़, अंडमान निकोबार द्वीप
बेबर या दहिया - मध्यप्रदेश
पोडू या पेंडा - आंध्रप्रदेश
कुरुवा - झारखंड
वालरे या वाल्टरे - द.पू. राजस्थान
हिमालय क्षेत्र में - खिल
पश्चिमी घाट में - कुमारी
पामाडाबी या कोमान या बरिगा - ओड़िसा
मिल्पा - मेक्सिको, मध्य अमेरिका
रोका - ब्राजील
मसोले - मध्य अफ्रीका
कोनुका - वेनेजुएला
लदांग - इंडोनेशिया
रे - वियतनाम
चलवासी पशुचारण :-
●इस प्रकार की कृषि में पशुचारण अपने पशुओं के साथ चारे और पानी के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते रहते हैं।
●इस प्रकार की कृषि भारत के राजस्थान और जम्मू कश्मीर, सहारा के शुष्क एवं अर्ध शुष्क प्रदेशों में और मध्य एशिया में प्रचलित है।
●पशुचारण भेड़, ऊँट, मवेशी,याक और बकरियां पालते हैं। इन पशुओं से इन्हें ऊन,दूध,मांस,खाल और अन्य उत्पाद प्राप्त होतेे हैं।
वाणिज्यिक कृषि :-
●वाणिज्यिक कृषि में विस्तृत कृषि क्षेत्र और अधिक पूंजी का उपयोग किया जाता है।
●इस प्रकार की कृषि में फसलो का उत्पादन केवल व्यावसायिक उपयोग के लिए किया जाता है। अर्थात कृषि का मुख्य उद्देश्य पैदावार की बिक्री करना होता है।
●अधिकांश कार्य मशीनों के द्वारा किया जाता है।
●इस कृषि में मिश्रित कृषि, रोपण कृषि,वाणिज्यिक अनाज कृषि शामिल है।
● वाणिज्यिक फसल(नगदी फसल) के अंतर्गत गन्ना, कपास, जूट, तंबाकू, तिलहन, केला आदि आता है।
मिश्रित कृषि :-
●मिश्रित कृषि में भूमि का उपयोग कई तरह की फसलें उगाने और साथ ही पशुधन पालन के लिए किया जाता है।
●जिससे कृषक खेती से, बचे समय के बाद पशुपालन करके अपनी आय में वृद्धि कर सके।
●इस प्रकार की कृषि अमेरिका,अर्जेंटीना,दक्षिण-पूर् वी ऑस्टेलिया, न्यूजीलैंड,दक्षिण अफ्रीका,यूरोप में प्रचलित है।
रोपण कृषि :-
●रोपण कृषि,वाणिज्यिक कृषि के अंतर्गत आता है।
●रोपण कृषि अत्यधिक पूंजी और श्रमिकों की सहायता से एक व्यापक क्षेत्र में की जाती है।
●इस प्रकार की खेती में, एक व्यापक क्षेत्र में एकल फसल बोई जाती है।
●भारत मे चाय,कॉफी, गन्ना, केला,रबड़ आदि महत्वपूर्ण रोपण फसले है।
●कर्नाटक में कॉफी,असम एवं उत्तरी बंगाल में चाय,उत्तर प्रदेश में गन्ना प्रमुख रोपण फसले है।
वाणिज्यिक अनाज कृषि :-
●वाणिज्यिक अनाज कृषि में फसलें वाणिज्यिक उद्देश्य से उगाई जाती है।
●इस कृषि में गेहूं और मक्का समान्य रूप से उगाई जाने वाली फसले है।
●इसके प्रमुख क्षेत्र एशिया, यूरोप,उत्तरी अमेरिका, शीतोष्ण घास के मैदान है।
अन्तर्फ़सली कृषि या युग्म कृषि :-
दो या दो से अधिक फसल एक ही भूमि पर एक ही फसल वर्ष में उगाना अर्थात एक ही भूमि पर विभिन्न मौसमों में दो फसल उगाना, अन्तर्फ़सली कृषि या युग्म कृषि कहलाती है।
शस्य प्रारूप :-
भारत मे तीन शस्य ऋतुएँ है।
1.रबी
2.खरीफ
3.जायद।
रबी की फसल :-
●रबी की फसल को शीत ऋतु में अक्टूबर से दिसंबर के मध्य बोया जाता है। और ग्रीष्म ऋतु में अप्रैल से जून के मध्य काटा जाता है।
●इसकी मुख्य फसलें गेहूं,जौ,चना,सरसों,अलसी,मटर,आलू ,राई,मसूर,गाजर,मूली आदि है।
खरीफ की फसल :-
●खरीफ की फसलें जून-जुलाई में बोई जाती हैं। और नवंबर-दिसंबर में काट ली जाती हैं।
●इसकी मुख्य फसलें धान, गन्ना, ज्वार, बाजरा, तिलहन, मक्का, अरहर(तुर),मूँग, उड़द,कपास,जुट,मूगफली, सोयाबीन आदि है।
●असम,प.बंगाल, उड़ीसा में धान की तीन फसलें ऑस, अमन,बोरो बोई जाती है।
जायद की फसल :-
●जायद की फसलें मई-जून में बोई जाती हैं। और जुलाई-अगस्त में काट ली जाती हैं।
●इसकी मुख्य फसलें तरबूज,खरबूज,खीरा,सब्जिया,ककडी, भिण्डी है।
● मूंग एवं उड़द जैसी फसलें जायज में मुख्यतः सिंचित क्षेत्रों में ही उगाई जाती हैं।
मुख्य फसले :-
चावल :- यह खरीफ की फसल है।
●इसे उगाने के लिए उच्च तापमान (25 सेल्सियस सेे ऊपर) और अधिक आद्रता(100 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा) की आवश्यकता होती है।
● चावल की खेती भारत के पूरे कृषि क्षेत्र के 42.41 मिलियन हेक्टेयर पर किया जाता है।
● भारत की प्रमुख खाद्यान्न फसल चावल है।
● भारत में चावल का कटोरा कृष्णा-गोदावरी डेल्टा क्षेत्र( आंध्र प्रदेश) को कहा जाता है।
● चावल की प्रमुख किस्में- हंसा,जया, पदमा, रत्ना, बाला, अन्नपूर्णा, कावेरी,कृष्णा,जगन्नाथ, कांची, करुणा , पूसा सुगंधा-5,लालमती,नरेंद्र संकर, नरेंद्र सम्राट, बारानी दीप है।
● धान का वैज्ञानिक नाम oryza sativa है।
●चावल की फसल के लिए जैव उर्वरक का कार्य करते है :-
1.नील हरित शैवाल (ब्लू ग्रीन एल्गी),
2.एजोस्प्रीलियम,
3.फास्फोबैक्टीरिया एजोला आदि
● धान की खेती पूर्वी तट की नदी घाटियों में बड़े पैमाने पर की जाती है जबकि पश्चिमी तट में अपेक्षाकृत कम धान पैदा किया जाता है।
● धान की फसल की बीमारी खैरा,ब्राउन लीफ स्पोट,ब्लास्ट(झोका) आदि है।
● चावल में बौनेपन का जीन डी.जी.वू. है।
धान की प्रमुख किस्मे बोये जाने एवं कटे जाने का समय :-
किस्म बोया जाना काटा जाना
• अमन जून-जुलाई नवंबर-दिसंबर
• ऑस या कार मई-जून सितंबर-अक्टूबर
•बोरो या दलुअ नवंबर-दिसंबर मार्च-अप्रैल
●अमन जाड़े की फसल,ऑस या कार शरद की फसल,बोरो या दलुअ ग्रीष्म कालीन की फसल है।
गेहूं :- इसेे उगाने के लिए 50 से 75 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा और 10 डिग्री सेंटीग्रेड से 25 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान की आवश्यकता होती है।
●जिसे मध्यम ताप एवं मध्यम वर्षा कहां जा सकता है।
●गेहूं की खेती पूरे कृषि क्षेत्र के लगभग 29.7 मि हैक्टेयर भाग पर की जाती है।
● गेहूं का वैज्ञानिक नाम tritium aestivum है।
● गेहूं में बौनेपन का जीन नोरिन-10 है।
● मैकरोनी गेहूं, सूखा प्रभावित क्षेत्रों अथवा असिंचित परिस्थितियों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है।
● गेहूं की फसल का रोग रस्ट,कंडुआ है।
●रस्ट गेहूं का रोग तीन प्रकार का होता है पीला किट्ट, भूरा किट्ट,काला किट्ट ।
● गेहूं की प्रमुख किस्में- सोनालिका,अर्जुन,कल्याण सोना, कुंदन आदि ।
●ट्रिटिकेल,गेहूं और राई के मध्य संकर का प्रतिफल है।
मोटे अनाज :- ज्वार, बाजरा, रागी भारत मेंं उगाये जाने वाले मुख्य मोटे अनाज हैं।
●इसमें पोषक तत्व लोहा,कैल्शियम आदि की मात्रा अत्यधिक होती है
●मोटे अनाज और चावल अधिकांशतः निर्वाहमूलक कृषि के अंतर्गत पैदा किये जाते है।
●आनाज के दानों का उत्पाद जई का आटा या ओट मील है। इसे भोजन एवं पशुओं के चारों के रूप में उपभोग किया जाता है।
बाजरा :- यह बलुआ काली मिट्टी पर उगाया जाता है।
रागी :- रागी शुष्क प्रदेशों की फसल है। यह लाल, काली, बलुआ दोमट मिट्टी पर उगाई जाती है।
मक्का :- यह खरीफ की फसल है।
●इसे 21℃ से 27℃ तापमान में और पुरानी जलोढ़ मिट्टी में उगाई जाती है।
●इसे पकने में 140 से 150 दिन लगते है।
●बिहार में मक्का रबी के ऋतु में भी उगाई जाती है।
● मक्का में बौनेपन का जीन ओपेक-2 है।
●भारत मे मक्के की खेती वर्ष भर की जा रही है।
●मक्के के तेल का प्रयोग जैव डीजल के उत्पादन के लिए किया जाता है।
●मक्के के प्रयोग से कई प्रकार के एल्कोहली पेय पदार्थ जैसे कार्न-व्हिस्की(अमेरिकी मदिरा),काउइम(ब्राजील की बीयर) आदि तैयार की जाती है।
●मक्के का प्रयोग मंड पाउडर(starch),डेकस्ट्रिन,साया टेक्स जैसे उत्पादन में होता है।
●मक्का एवं गन्ना C4 पौधे के उदाहरण है।
जबकि चावल, गेहूं, जौ,राई, सोयाबीन, कपास, तंबाकू, आलू आदि C3 पौधे के उदाहरण है।
●मक्का की किस्म- शक्तिमान-1,शक्तिमान-2 है।
दालें :- भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश है।
●अरहर को छोड़कर अन्य सभी दालें वायु से नाइट्रोजन लेकर भूमि की उर्वरता को बनाए रखती हैं।
●अरहर, उड़द, मूंग, मसूर, चना, मटर, भारत की मुख्य दलहनी फसलें हैं।
● अरहर की किस्में- यू.पी.ए.एस.-120,ICPL151,ICPL- 87,NDA-1, बहार, मालवीय चमत्कार,अमर,आजाद, मालवी विकास, पारस है।
● भारत में सामान्यतः दालें निर्यात नहीं की जाती है।
● दलहनी फसलों के उत्पादन के लिए कोबाल्ट राइजोबियम आवश्यक तत्व होते हैं।
● दलहनी अथवा फलीदार फसलों में संतुलित उर्वरक का अनुपात होता है :-
0:1:1 या 1:2:2 या 1:2:3
● अरहर का जन्म स्थान भारत है।
● अर्पणा मटर की पत्तीविहीन प्रजाति है।
गन्ना :- गन्ना एक उष्ण एवं उपोष्ण कटिबंधीय फसल है।
●यह फसल 21℃ से 27℃ तापमान और 8 माह तक लगभग 75cm से 200cm वार्षिक वर्षा की आवश्यकता पड़ती है।
● भारत की प्रथम चीनी मिल उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के प्रतापपुर में 1903 में स्थापित की गई थी।
● उत्तर प्रदेश राज्य भारत का शक्कर का प्याला कहलाता है।
● यदि गन्ने के पकने की अवधि में पाला गिर जाए तो गन्ने में शर्करा की मात्रा घट जाती है।
● शक्कर नगर, चीनी का एक प्रमुख उत्पादक केंद्र है जो तेलंगाना राज्य में स्थित है।
● गन्ना प्रजनन संस्थान की स्थापना 1912 में कोयंबटूर (तमिलनाडु) में की गई थी। 1 अप्रैल 1969 को इसे आईसीएआर का भाग बनाया गया।
● गन्ना पकने के लिए 18 महीने का समय लेती है।
● उत्तर भारत से दक्षिण भारत में चीनी उद्योगों के स्थानिक स्थानांतरण होने के कारण:-
1. गन्ने की उच्च उत्पादकता
2. गन्ने में शर्करा की मात्रा का अधिक होना
3. पेराई के लिए लंबा मौसम का होना आदि।
● चीनी उत्पादन प्रक्रम में शीरा एक उपोत्पाद है। जिसका उपयोग अल्कोहल बनाने में किया जाता है। और प्राप्त खोई का उपयोग भाप बनाने के लिए ईंधन के रूप में किया जाता है।
●बराक घाटी में उपजाई जाने वाली महत्वपूर्ण फसल धान है। जबकि दूसरी महत्वपूर्ण फसल गन्ना है।
तिलहन :- सरसों,अलसी,सूरजमुखी,तिल,बिनौला , सोयाबीन,मूंगफली,अरंडी, नारियल,तोरिया आदि भारत में उगाई जाने वाली मुख्य तिलहन फसलें हैं।
●कुछ तेल के बीजों का साबुन, सिंगार का सामान और उबटन उद्योगों में कच्चे माल के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।
●तिल उत्तरी भारत में खरीफ की फसल है और दक्षिण भारत में रबी की फ़सल है।
अरंडी, खरीफ और रबी दोनों ही ऋतु में बोई जाती है।
● शुष्क भूमि के लिए सर्वाधिक उचित फसल मूंगफली है इसे कम जल की आवश्यकता होती है।
● फसलों की औसत वार्षिक जल की आवश्यकता :-
गन्ना - लगभग 150 cm (सर्वाधिक)
जूट - लगभग 125- 200 cm
गेहूं - लगभग 80 cm
मुंगफली - लगभग 50-80 cm (सबसे कम)
●पेगिंग, मूंगफली की फसल में होने वाली एक लाभकारी प्रक्रिया है।
● मूंगफली की फसल में जिप्सन की अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है।
● मूंगफली की प्रजातियां- कौशल, चन्द्रा, चित्रा-64 आदि।
● सरसों की प्रमुख प्रजातियां- पूसा,पूसाबोल्ड, जय किसान और वरुणा है।
● चना की प्रजातियां- गौरव, राधे,के-4,पंत-114 आदि है।
चाय :- चाय की खेती रोपण कृषि का उदाहरण है।
●चाय का पौधा उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु ह्यूमस और जीवाश्म युक्त गहरी मिट्टी तथा सुगम जल निकासी वाले ढलवा क्षेत्रों में उगाया जाता है। और वार्षिक वर्षा 150cm से 200cm तक होनी चाहिए।
●क्षेत्रफल और उत्पादन दोनों ही दृष्टि से असम भारत का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य है। यहां चाय का अधिकतम क्षेत्र ब्रम्हपुत्र घाटी में फैला है।
●चाय के फसल के निर्यात से सर्वाधिक विदेशी मुद्रा भारत को प्राप्त होती है।
●भारत अपनी आवश्यकता से अधिक चाय का उत्पादन करता है।
●चाय की किस्मे- ग्रीनगोल्ड है।
काफी :- हमारे देश में अरेबिका किस्म की काफी पैदा की जाती है। जो यमन से लाई गई थी।
●इसकी कृषि की शुरुआत बाबा बूदन की पहाड़ियों से हुुुई थी।
●इसकी खेती नीलगिरी पहाड़ियों की आस पास कर्नाटक,तमिलनाडु,केरल में की जाती है।
● भारत में कहवा की दो प्रमुख किस्में अरेबिका और रोबस्ता है।
●काफी उत्पादन के लिए 15 डिग्री सेंटीग्रेड से 18 डिग्री सेंटीग्रेड औसत वार्षिक तापमान तथा 150 से 250 सेंटीमीटर की औसत वार्षिक वर्षा की आवश्यकता पड़ती है।
● ढलवा पर्वतीय धरातल एवं दोमट अथवा लावा निर्मित मिट्टी इसके लिए उपयुक्त होती है।
●भारत में विश्व की कुल काफी उत्पादन का मात्र 2% उत्पादन किया जाता है।
●भारत में काफी का सर्वाधिक उत्पादन करने वाला राज्य कर्नाटक है।
● भारत में राष्ट्रीय बागवानी परिषद की स्थापना 1984 में की गई इसका मुख्यालय गुड़गांव(हरियाणा) में स्थित है
●भारत के कर्नाटक राज्य में कहवा,रबड़,तंबाकू इन सभी की कृषि की जाती है।
बागवानी फसले :- भारत उष्ण और शीतोष्ण कटिबंधीय दोनों ही प्रकार के फलों का उत्पादक है।
●भारत मे बागवानी कृषि के अंतर्गत उगाई जाने वाली प्रमुख फसले- चाय,कहवा(काफी),रबड़,नारियल आदि है।
रबड़ :- रबड़, भूमध्य रेखीय प्रदेश की फसल है। ●यह फसल उष्ण और उपोष्ण क्षेत्र में भी उगाई जाती है।
●इसको 200 cm से अधिक वर्षा और 25℃ से अधिक तापमान वाली नम और आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है।
●इसे मुख्य रूप से केरल,तमिलनाडु,कर्नाटक,मेघालय अंडमान निकोबार, गारो की पहाड़ियों में उगाया जाता है।
●भारत का सबसे बड़ा रबड़ उत्पादक राज्य केरल है।
यहां देश का 90% रबड़ उत्पादित किया जाता है।और शेष 10% उत्पादन कर्नाटक में होता है।
रेशेदार फसले :- भारत में उगाई जाने वाली चार मुख्य रेशेदार फसलें कपास, जूट, सन, प्राकृतिक रेशम है।
●कपास, जूट, सन मिट्टी में फसल उगाने से प्राप्त होती हैं।
●और प्राकृतिक रेशम, रेशम के कीड़ों के कोकून से प्राप्त होता है। जो मलबरी पेड़ की हरी पत्तियों पर पलता है।
रेशम (सिल्क) :- रेशम, प्राकृतिक प्रोटीन से बना रेशा होता है।
● इन प्रोटीन रेशों में मुख्यतः फ़िब्रोइन (fibroin) होता है।
●ये रेशे कुछ कीड़ों के लार्वा द्वारा बनाये जाते है।
● सबसे उत्तम रेशम शहतूत के पत्तों पर पलने वाले कीड़ों के लार्वा द्वारा बनाया जाता है।
रेशम के प्रकार उत्पादक राज्य
शहतूत रेशम कर्नाटक (43%)सर्वाधिक उत्पादन
टसर रेशम झारखंड (63%)
ईरी रेशम असम (62.08%)
मूंगा रेशम असम (90.75%)
ओक टसर रेशम मणिपुर
● टसर रेशम को दो भागों में विभाजित किया गया है
1.ट्रॉपिकल टसर रेशम - सर्वाधिक उत्पादन झारखंड
2.ओक टसर रेशम - सर्वाधिक उत्पादन मणिपुर।
● कर्नाटक देश के कुल कच्चे रेशम का लगभग 34% भाग उत्पादित करता है।(प्रथम स्थान)
और आंध्र प्रदेश कुल कच्चे रेशम का 27%भाग उत्पादित करता है। (द्वितीय स्थान)
● रेशम वस्त्र का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कर्नाटक है दूसरा असम है।
कपास :- भारत को कपास के पौधे का मूल स्थान माना जाता है।
● कपास के रेशे बीज से प्राप्त होते हैं।
●दक्कन पठार के शुष्कतर भागों में काली मिट्टी कपास उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
●यह खरीफ की फसल है इसे पककर तैयार होने में 6 से 8 महीने लगते हैं।
● देश के 6% कृषि क्षेत्र पर कपास की खेती की जा रही है।
● देश में कपास का 75% उत्पादन केवल चार राज्यों गुजरात(सर्वाधिक उत्पादन), महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, हरियाणा से प्राप्त होता है। अर्थात उत्तर पश्चिमी व पश्चिमी भारत कपास का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है।
● मध्यप्रदेश में कपास की कृषि मुख्यतः राज्य के पश्चिमी भाग में मालवा पठार एवं नर्मदा घाटी क्षेत्र में की जाती है।
● कपास की खेती के लिए शाजापुर-उज्जैन( मध्य प्रदेश) को सफेद सोने का क्षेत्र भी कहा जाता है।
● कपास को महाराष्ट्र में श्वेत स्वर्ण के नाम से जाना जाता है।
● ऋग्वेद एवं मनु स्मृति में कपास के पौधे का उल्लेख मिलता है।
● कपास की प्रजातियां- सुजाता,सुविन,श्यामली,देशी आदि।
जूट :- जूट को सुनहरा रेशा कहा जाता है।
●जूट की फसल बाढ़ के मैदानों में जल निकास वाले उर्वरक मिट्टी में उगाई जाती है।
●जहां हर वर्ष आए बाढ़ से नई मिट्टी जमा होती रहती है।
●इसका प्रयोग बोरियां,चटाई,रस्सी,तंतु व धागे, गलीचे आदि वस्तुएं बनाने में किया जाता है।
●जूट को भारत का स्वर्णिम तंतु कहते है।
●जूट की किस्म- मेस्टा जिसका उत्पादन प.बंगाल और आंध्र प्रदेश में होता है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर
●देश के प्रथम कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1960 में पंतनगर में हुआ था।
●भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा देश के प्रथम कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना 17 नवम्बर,1960 को उत्तर प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय(UPAU) के रूप में पंतनगर, उत्तराखंड(तत्कालीन उत्तरप्रदेश) में किया गया था।
● बाद में इसका नाम बदलकर गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कर दिया गया।
●भारत मे वैश्वीकरण की शुरुआत नरसिम्हाराव द्वारा वर्ष 1991 में की गई ।
●जिससे भारतीय कृषि पर वैश्वीकरण का अत्यधिक प्रभाव पड़ा।
●जिसके परिणाम स्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भारतीय किसानों के उत्पादों की पहुंच बड़ी,नगदी फसलो पर अत्यधिक बल मिला,आय असमानता में वृद्धि, आर्थिक सहायता में कटौती आदि शामिल है।
●वैश्वीकरण के तहत बड़े किसानों को अधिक लाभ होता है जबकि छोटे किसानों को उतना लाभ नही होता है।
●स्वतंत्र भारत के पहले मंत्रिमंडल में कृषि और खाद्य मंत्री डॉ राजेंद्र प्रसाद को बनाया गया था।
●तबाकू की पत्तियों को सुखाने की प्रक्रिया को क्यूरिंग कहते हैं।
●जिससे पत्तियों में वांछित रंग गंध आदि गुणों का विकास होता है।
●मक्का में वाइटबड एवं धान में खैरा रोग जस्ता की कमी के कारण होता है।
●दलहनी फसलों के उत्पादन हेतु कोबाल्ट आवश्यक तत्व होता है।
●खाद्य एवं कृषि संगठन एफएओ के मानकों के अनुसार खाद्यान्नों के सुरक्षित भंडारण के समय सापेक्षिक आर्द्रता (नमी) 14% तक होनी चाहिए।
●भारत मे शुद्ध बुआई क्षेत्र 45.82%,वन क्षेत्र 22.92%(वृक्ष सहित) तथा अन्य क्षेत्र 31.26% है।
●भारत में चालू जोतों का सबसे बड़ा औसत आकार राजस्थान में पाया जाता है। दूसरे स्थान पर पंजाब है।
●भारत में रसायनिक उर्वरकों के बड़े उपभोक्ता क्रम से उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा है।
●नई सुधारी गई उसर भूमि में हरी खाद के लिए सर्वाधिक उपयुक्त फसल ढेंचा है।
●दक्षिण भारत में उच्च कृषि उत्पादकता का क्षेत्र आंध्र प्रदेश का तटवर्ती क्षेत्र, तमिलनाडु का तटीय भाग, गुजरात का सूरत क्षेत्र, महाराष्ट्र के कोल्हापुर और सतारा क्षेत्र हैं।
●पुनर्भरण योग्य भौम जल संसाधन में उत्तर प्रदेश सबसे संपन्न राज्य है।
●भारत में ठेकेदारी कृषि को लागू करने में पंजाब राज्य सबसे अग्रणी है।
●नेशनल ब्यूरो आफ स्वायल सर्वे के अनुसार भारत को 20 कृषि पारिस्थितिक क्षेत्र और 60 कृषि पारिस्थितिक उपक्षेत्र में विभाजित किया गया है।
● सरसों का वैज्ञानिक नाम brassica campestris ,मटर का वैज्ञानिक नाम pisum sativam और चना का वैज्ञानिक नाम cicer arietinum है।
● मसलो का बगीचा, केरल राज्य को कहा जाता है।
●केरल राज्य विश्व भर में गरम मसालो के लिए प्रसिद्ध है।
●लौंग यूजीनिया कैरियो फ़ाइलेटा नामक माध्यम कद वाले सदाबहार वृृक्ष की सूखी हुई पुष्प कलिका है।
●भारत मे लौंग की व्यापक कृषि केरल में की जाती है।
●काली मिर्च को भारत मे काला सोना के नाम से जाना जाता है।
●काली मिर्च को उपजाने के लिए उष्ण और आर्द्र जलवायु के साथ 200cm वार्षिक वर्षा,15℃ से 30℃ तक वार्षिक ताप और 1100 से 1300 मीटर तक ऊँचाई के पहाड़ी ढाल की आवश्यकता होती है।
●गन्ना, चुकंदर, चना,अरहर,स्वीट पी, फराशबीन
त्रिपादक कुल के अंतर्गत आते है।
●धान, मक्का, गेंहू को पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए सर्वाधिक उपयुक्त फसल चक्र समझा जाता है।
●भागीरथी घाटी में राजमा और आलू की खेती प्रारंभ करने का श्रेय फ्रेडरिक विल्सन को दिया जाता है।
इन्हें पहाड़ी एवं राजा ऑफ हरसिल के नाम से भी जाना जाता है।
●आलू की सबसे अच्छी किस्म :-
• कुफरी चिप्सौना-3 मैदानी क्षेत्रों के लिए
• कुफरी हिमसोना पहाड़ी क्षेत्रों के लिए है।
●आम की बीजरहित प्रजाति सिंधु है यह विश्व की एकमात्र बीज रहित प्रजाति है।
●आम की आम्रपाली किस्म भारतीय अनुसंधान संस्थान पूसा द्वारा वर्ष 1971 में दशहरी एवं नीलम के क्रॉस से विकसित की गई थी।
●आम की नियमित फसल वाली प्रजाति दशहरी-51,तोतापुरी(बैंगालोरा), नीलम,आम्रपाली आदि है।
●ललित अमरुद की उन्नत किस्म है।
●उत्तराखंड में उगाया जाने वाला अनाज मंडुआ(कोदा) का निर्यात जापान में किया जाता है।
मंडुआ से बनी खाद्य सामग्री का विदेश में बड़ी मांग होती है।
●सोयाबीन के बीज में 20%तेल और 40%प्रोटीन होता है।
●इंडियन कौंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च के प्रथम महानिदेशक डॉ. बी.पी.पाल थे।
● फसल फसल नाशक जीव
• अनाज,फल,गेंहू एफिड
• चावल घुंडी मत्कुण
• गन्ना शीर्ष प्ररोह वेधक शलभ
• चना गोलक शलभ(boll ulorm)
● फसल का नाम बीमारी का नाम
• आलू झुलसा(late blight)
• अरहर उक्ठा(विल्ट)
• धान खैरा
• गन्ना रेड राट
● बोर्ड मुख्यालय
• कॉफी बोर्ड बंगलेरू
• रबड़ बोर्ड कोट्टायम
• चाय बोर्ड कोलकाता
• तम्बाकू बोर्ड गुंटुर
● प्रमुख फसलो का जन्म स्थान
फसल जन्म स्थान
• गेेंहू मध्य एशिया
• गेेंहू मध्य एशिया
• जौ चीन
• सोयाबीन चीन
• चाय चीन
• मसूर चीन
• मक्का मध्य अमेरिका
• तम्बाकू दक्षिण अमेरिका
• अमरूद अमेरिका
• रबड़ दक्षिण अमेरिका(ब्राजील)
• कहवा ब्राजील
• धान भारत व इंडोनेशिया
• उरद भारत
• मूँग भारत
• ज्वार भारत
• गन्ना भारत
• बाजरा अफ्रीका
• अरहर अफ्रीका
• आलू पेरू
• टमाटर मेक्सिको
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